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गाय आधारित खेती को बढ़ावा देंगे कृषि विज्ञान केंद्र

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उझानी पहुंची साहीवाल प्रजाति की गाय। संवाद - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। गाय आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कवायद शुरू कर दी है। सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय मेरठ ने अपने 10 कृषि विज्ञान केंद्रों को साहीवाल नस्ल की एक-एक गाय मुहैया कराई हैं। दुग्ध क्रांति के क्षेत्र में काफी अहम साबित हुई इस नस्ल की गायों के मूत्र और गोबर का इस्तेमाल खेती में होगा। जिस खेत में गोबर और गोमूत्र डाला जाएगा, उसमें रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाएगा। फसल प्रदर्शनी के जरिये किसानों को रूबरू भी कराया जाएगा।
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साहीवाल नस्ल की गाय की अनुमानित कीमत करीब 70 हजार रुपये है। इस नस्ल की गाय प्रतिदिन करीब 15 लीटर दूध देती है। गोबर और गोमूत्र खेती के लिए काफी उपयोगी बताया जाता है। गाय आधारित खेती को बढ़ावा दिनों के लिए पिछले महीने सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति आरके मित्तल ने कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया था।
मेरठ विश्वविद्यालय के अधीन 20 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। पहले चरण में उझानी, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, नोएडा, रामपुर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर आदि 10 केंद्रों को एक-एक गाय भेजी गई है। केंद्रों पर फसल क्षेत्र प्रदर्शनी के लिए एक-एक कृषि वैज्ञानिक देखरेख करेंगे। फसल से अच्छी उपज लेने के लिए बुआई से लेकर कटाई तक खेत में साहीवाल नस्ल की गाय के मूत्र और गोबर का इस्तेमाल किया गया। गोबर से केंचुआ खाद भी बनाई जाएगी। कृषि वैज्ञानिक इस दौरान इलाके के किसानों को प्राकृतिक खेती करने के तौर-तरीकों की भी जानकारी देते रहेंगे। गोबर आधारित प्राकृतिक खेती का असल मकसद लोगों को बिना रासायनिक खाद इस्तेमाल के अच्छी गुणवत्ता का अनाज मुहैया कराना है।
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कृषि वैज्ञानिक आनंद प्रकाश करेंगे गाय की देखरेख
साहीवाल नस्ल की गाय पाकिस्तान में पाई जाती हैं। दुग्ध उत्पादन में सर्वश्रेष्ठ इस नस्ल की गायों का खानपान और दिनचर्या भी सामान्य है। गाय आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए साहीवाल गाय के पहुंचने के बाद प्रभारी अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने कृषि वैज्ञानिक आनंद प्रकाश को जिम्मेदारी सौंपी है। केयरटेकर के रूप में एक कर्मचारी को भी लगाया है। साहीवाल गाय का विशेष ख्याल रखा जाएगा। इसके मूत्र और गोबर का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल होगा।
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साहीवाल गाय सबसे अच्छी प्रजातियों में गिनी जाती है। विश्वविद्यालय स्तर पर काफी कुछ विचार-विमर्श के बाद ही साहीवाल प्रजाति का चयन किया गया है। गाय आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा। कम लागत में अधिक पैदावार के लिए प्राकृतिक खेती काफी फायदेमंद साबित होगी।
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- डॉ. संजय कुमार, प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र
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