बदायूं। गांवों में चौपालों पर इन दिनों चुनाव को लेकर ही चर्चा है। मैदान में डटे प्रत्याशी भी गांव-गांव जनसंपर्क कर वायदे कर रहे हैं। ग्रामीणों का रुख अभी साफ नहीं है, लेकिन उनका साफ कहना है कि वोट विकास के मुद्दे पर ही देंगे।
बिसौली विधानसभा के ब्लॉक आसफपुर के तहत आने वाली ग्राम पंचायत संग्रामपुर की आबादी 13 हजार से ज्यादा है। आस-पास सिरसांवा, बिजौरी, लक्ष्मीपुर, दबतोरा, पुरवा खेड़ा, धनूपुरा भी बड़ी आबादी के गांव हैं। इन गांवों को मूलभूत सुविधाओं की अब भी दरकार है। बृहस्पतिवार को गांव में चौपाल पर लोग चुनाव को लेकर चर्चा करते दिखे। चौपाल पर बैठे लोगों के अपने-अपने तर्क थे। बड़े नेताओं के कैंपेन को लेकर बने माहौल को लेकर भी ग्रामीण अपनी-अपनी बात रखते दिखे। कोई अपने मनपसंद प्रत्याशी का दंभ भर रहा था तो कोई विकास की बात कर रहा था।
शिक्षिक ग्रामीणों का कहना था कि अगर वोट विकास के मुद्दे पर दिया जाए तब अपने जनप्रतिनिधि से विकास न होने पर शिकायत भी कर सकते हैं। जबकि जाति-बिरादरी के नाम पर दिया गया वोट ही विकास की राह में बाधा बनता है।
पूर्व प्रधान मोहम्मद जमीर अहमद का कहना था जनहित के काम करने के साथ कल्याणकारी योजनाओं और विकास को तवज्जो देने वाला जनप्रतिनधि हो तो शिकायत का मौका नहीं मिलता।
शानू ने विकास के साथ कानून व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। राशिद मियां, फरजंद समेत कई ग्रामीणों ने बेरोजगारी पर अपनी बात रखी तो मुनाजिर अय्यान, रियाज और वसीम ने हार जीत को लेकर तर्क दिए।
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महंगाई पर काबू और विकास को रफ्तार मिलनी चाहिए। गरीबों को लेकर सरकार को और काम करने की जरूरत है। हालांकि, कोरोना काल में सरकार ने गरीबों को मुफ्त अनाज मुहैया करा कर अच्छा काम किया है। महिलाओं को तो उनके पति के कहने पर वोट देना है।
-शकीला बेगम
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केंद्र और प्रदेश सरकार ने कई अच्छे काम भी किए हैं, लेकिन स्थानीय मुद्दे चुनाव में हावी रहते हैं। गांव-देहात तक अब भी जितना विकास होना चाहिए था उतना नहीं हुआ है। इसकी जिम्मेदारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी होती है। इस बार विकास के मुद्दे पर वोट होगा।
-शाबिया बेगम
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अगर कोई सरकार या जनप्रतिनधि वर्ग और जाति विशेष को लेकर काम करता है तो वह ठीक नहीं है। चुनाव का सीजन है, प्रत्याशी तमाम वायदे करते हैं। मतदाताओं को चाहिए कि किसी के किसी के बहकावे में बिना आए वोट दें, तभी गांव-देहात के विकास की आस पूरी हो सकेगी।
-छोटू
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अब चुनाव विकास के मुद्दे पर होता ही कहां है। जाति-धर्म के नाम पर लोग वोट करते हैं और बाद में शिकायत करते हैं कि विकास नहीं हुआ। महंगाई और बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है। वोट मांगने आने वाले प्रत्याशियों के सामने ग्रामीण अपनी बात रखें और विकास की गारंटी लें। -हलीम