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जातिगत समीकरणों पर दिखा स्वामी इफेक्ट, शाक्य बिरादरी के दो प्रत्याशी

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बदायूं। टिकट वितरण में भाजपा ने 2017 की तरह ही जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की है। हालांकि, टिकट वितरण में स्वामी प्रसाद मौर्य इफेक्ट भी साफ दिख रहा है। माना जा रहा था कि भाजपा दो सीटों पर मौर्य-शाक्य बिरादरी के प्रत्याशी नहीं उतारेगी, लेकिन पार्टी के सामने गैर यादव पिछड़ा वर्ग को जोड़े रहने के साथ जिले में स्वामी प्रसाद मौर्य और महान दल-सपा गठबंधन के असर को कम करने का दबाव था।
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बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में 55 हजार से ज्यादा मौर्य, शाक्य बिरादरी के मतदाता हैं। इसके अलावा शेखूपुर, दातागंज और शहर सीटों पर भी गैर यादव पिछड़ा वर्ग मौर्य-शाक्य मतदाता चुनावों को प्रभावित करते हैं। इसी के मद्देनजर भाजपा ने शेखूपुर के साथ बिल्सी सीट से भी मौर्य-शाक्य प्रत्याशी उतारा है। भाजपा ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य वर्ग से एक-एक प्रत्याशी बनाने के साथ पिछड़ा वर्ग के दो प्रत्याशी बनाए हैं। बिसौली सुरक्षित सीट से मौजूदा विधायक कुशाग्र सागर को ही उतारा है। भाजपा को उम्मीद है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य वर्ग का मतदाता उससे दूर नहीं जाएगा। पिछड़ा वर्ग से दो प्रत्याशी बनाने का फायदा पार्टी को मिलेगा। 2017 के चुनाव में भाजपा ने वैश्य वर्ग से दो प्रत्याशी बनाए थे। इनमें शहर सीट से महेश गुप्ता और सहसवान से आशुतोष वार्ष्णेय थे।
मौर्य-शाक्य बिरादरी के दो प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे का एक प्रमुख कारण सपा-महान दल गठबंधन और हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य का सपा में शामिल होना भी है। हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्य बदायूं से भाजपा की सांसद हैं, लेकिन स्वामी प्रसाद के सपा में जाने के बाद स्थिति बदली है। सोशल मीडिया पर कटाक्षों के बीच सांसद अब प्रदेश स्तरीय नेताओं पर हमलावर होती दिख रही हैं। हालांकि उनकी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को आदर्श के रूप में दिखाया जा रहा है। संवाद
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