इंस्पेक्टर गौरव विश्नोई पुलिस टीम लेकर पहुंच गए। आरोपी को थाने लाकर पूछताछ की गई तो पता चला कि वह सिपाही नहीं है। उसके पास से वर्दी, वेल्ट, कैप (ताज लगी), पुलिस का बैच, डोरी-सीटी, जूते, खाकी मोजे, पहचान पत्र, मोबाइल और एक कार बरामद हुई है। उस पर एफआईआर दर्जकर आरोपी को जेल भेज दिया गया है। इस दौरान उनके परिवार वाले भी थाने पहुंचे। उन्होंने आरोपी हरीश को बेकसूर बताया।
बागपत के सिपाहियों से थी आरोपी की दोस्ती
बदायूं जिले में बागपत निवासी कई सिपाही और दरोगा तैनात हैं। उनमें अधिकतर पुलिस कर्मियों से आरोपी हरीश की दोस्ती थी। वह अक्सर उनके साथ देखा जाता था। कभी-कभी वह वर्दी पहनकर कोतवाली और पुलिस चौकियों पर पहुंच जाता था। हैरानी की बात यह है कि कभी पुलिस कर्मियों को भी पता नहीं चला कि वह पुलिस कर्मी नहीं है। बताते हैं कि उसे हर सिपाही, दरोगा और इंस्पेक्टर की जानकारी है। अगर किसी से पुलिस के विषय पर बात होती थी तो वह सबके नाम भी बताता था। इससे लोगों को अहसास हो जाता था कि वह सिपाही है और कहीं न कहीं तैनात है।
आरोपी के झूठ पर परिवार वालों को भी यकीन नहीं
आरोपी हरीश को जेल भेजे जाने के दौरान उसकी पत्नी, दो बेटियां और मां भी सिविल लाइन थाने में मौजूद थीं। वह उल्टे पुलिस कर्मियों पर आरोप लगा रहीं थीं कि हरीश को फर्जी आरोप में पकड़ा गया है। उनका कहना था कि हरीश सिविल डिफेंस में काम करता है। उसकी पोस्टिंग दिल्ली में है। थाना पुलिस ने झूठा आरोप लगाकर उसके खिलाफ कार्रवाई की है। उन्हें यकीन ही नहीं है कि हरीश उनके साथ झूठ बोल सकता है।