बदायूं। प्रधानमंत्री आवास योजना में दलालों के बढ़ते दखल की वजह लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात ये है कि लाभार्थी आवास बनाने के लिए किस्त मिलने का इंतजार रहे हैं, लेकिन बिना सांठगांठ के विभाग में लाभार्थियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात ये है कि जिले में अभी तक 56 फीसदी ही काम पूरा हो सका है, जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में केवल तीन माह का समय बचा है।
शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवास बनाने का जिम्मा डूडा का है। इसके तहत शासन के द्वारा इस साल विभाग को 8317 आवासों का लक्ष्य दिया था, लक्ष्य मिलने के बाद में विभाग ने पात्र लाभार्थियों का चयन किया। इसके बाद में उन्हें स्वीकृति प्रमाण पत्र दे दिया था। जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में तीन माह से भी कम समय बचा है। विभाग के अनुसार अभी तक 2845 आवास अंतिम चरण में हैं और 658 पूर्ण हो चुके हैं। बाकी के लाभार्थी किस्त पाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। जबकि दलालों के माध्यम से विभाग में फाइल पहुंचने के बाद में उनको प्राथमिकता के आधार पर किस्त जारी कर दी जाती है। वहीं लाभार्थी लगातार किस्त पाने के लिए भटक रहे हैं। उन्हें किस्त नहीं मिल पा रही है।
ऐसे मिलता है आवास
शासन द्वारा इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी डूडा को दी गई है। डूडा द्वारा प्रत्येक नगर पंचायत में एक अवर अभियंता को रखा गया है। आवेदन करने वालों लोगों की सूची बनाने के बाद जेई व सर्वेयर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं। इसके बाद पात्रों की लिस्ट बनती है। इस सूची को दोबारा लेखपाल के माध्यम से सत्यापित कराया जाता है। जांच के बाद फाइनल सूची बनती है। जिसको विभाग शासन को भेजता है। इसके बाद लाभार्थियों के खाते में धनराशि आती है।
तीन किस्तों में मिलती है पूरी धनराशि
-शासन द्वारा उपभोक्ता के पास पहली किस्त 50 हजार, दूसरी किस्त एक लाख 50 हजार व तीसरी किस्त 50 हजार रुपये आती है। पहली किस्त आने के बाद जितना निर्माण होता है, उसकी फोटो व वीडियोग्राफी कर जेई व सर्वेयर द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया जाता है, तब दूसरी किस्त आती है। इसी तरह दूसरी किस्त आने के बाद की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीसरी किस्त आती है।
जिले में शासन की मंशा के अनुरूप काम किया जा रहा है। जैसे-जैसे भौतिक सत्यापन के बाद में रिपोर्ट आ रही है। उसी के हिसाब से धनराशि लाभार्थियों को दी जा रही है।
-देेवेश कुमार सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा।