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सबसे ज्यादा मलेरिया के मामले निकलने में प्रदेश में दूसरे नंबर पर बदायूं

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बदायूं। नेशनल वेक्टर बॉर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत प्रदेश के सबसे ज्यादा मलेरिया प्रभावित जिलों को लेकर आई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। देश में वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा मलेरिया के मामले उत्तर प्रदेश में मिले। वहीं अगर प्रदेश के जिलों की बात करें तो मलेरिया के प्रकोप के मामले में बरेली पहले और बदायूं दूसरे नंबर पर है। मलेरिया का सीजन अगस्त से अक्तूबर तक होता है। वर्ष 2018 और 2019 में इन दोनों जिलों में मलेरिया के ज्यादा मरीज मिले हैं। बदायूं में तो वर्ष 2018 के मुकाबले रोगियों की संख्या 2019 में और बढ़ गई। ऐसे में नेशनल वेक्टर बॉर्न डिसीज प्रोग्राम के तहत इन दोनों जिलों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
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संक्रामक रोगों के सीजन में बदायूं के समरेर, दातागंज, जगत और सालारपुर ब्लॉक में मच्छर जनित संक्रामक बीमारियों का प्रकोप सबसे ज्यादा रहता है। वर्ष 2015 में जिले में संक्रामक बीमारियों से 200 से ज्यादा मौतें हुई थीं। सबसे ज्यादा मामले फेल्सीपेरम मलेरिया के सामने आए थे। 200 से ज्यादा मौतों से लखनऊ तक हड़कंप मचा था। इसके बाद संक्रामक रोगों से मौतों के सिलसिले पर तो ब्रेक लगा, लेकिन मलेरिया के मामले कम नहीं हुए। वर्ष 2018 में जिले में 1.57 लाख से ज्यादा संदिग्ध मलेरिया रोगी मिले। जांच में 16134 रोगियों को पीवी, 3950 को पीएफ कैटेगिरी के जानलेवा मलेरिया की पुष्टि हुई थी। कुल 20084 मरीजों की लंबे इलाज के बाद जान बची। वर्ष 2019 में जिले की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। इस साल 1.52 लाख से ज्यादा संदिग्ध मलेरिया रोगियों की जांच की गई। इनमें 18073 पीवी, 2022 पीएफ कैटेगरी के मलेरिया रोगियों की पुष्टि हुई। इस वर्ष भी 20095 मरीजों का लंबा इलाज चला। मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य समितियों को भी हर साल मोटा बजट मुहैया कराया जाता है। इसके बावजूद जिले की यह स्थिति चिंताजनक है।
मलेरिया रोगियों को लगाई जाती रही अधोमानक वैक्सीन
- मलेरिया को लेकर प्रदेश में बदायूं की बदतर स्थिति के साथ एक चौंकाने वाली बात और सामने आई है। संक्रामक रोगों के सीजन में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन ने जिले को मलेरिया के मरीजों को लगाई जाने वाली 85 हजार आर्टीमिथर वैक्सीन की सप्लाई की थी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी पर काबू पाने के लिए मरीजों को यह वैक्सीन लगाती रहीं। बाद में पता लगा कि वैक्सीन अधोमानक है। खुद यूपीएमएससी ने एक पत्र भेजकर यह बात स्वीकार की थी। सीएमओ ने इस संबंध में शासन स्तर को खत भी लिखा, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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गोदरेज इंडिया ने चार ब्लॉक के 10 गांव गोद लिए
- प्रदेश के 75 जिलों में मलेरिया के प्रकोप के मामले में बदायूं का दूसरा नंबर है। जिले के दातागंज, समरेर, जगत और सालारपुर के मलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले 100 गांवों को गोदरेज इंडिया लिमिटेड की संस्था फैमिली हेल्थ इंडिया ने गोद लिया है। संस्था प्रमुख डॉ. संतोष भार्गव के नेतृत्व में इन गांवों में साफ-सफाई और मच्छर जनित बीमारियों से बचने के लिए अभी से जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन शुरू कर दिया गया है। घर-घर लोगों को बताया जा रहा है कि किन सावधानियों के जरिए मच्छर जनित बीमारियों से बचा जा सकता है।
गांवों में गंदगी, जलभराव बनी बड़ी वजह
- मच्छर जनित बीमारियों की एक बड़ी वजह सफाई व्यवस्था के प्रति लोगों का जागरूक न होना है। संक्रामक रोगों के सीजन में भी गांवों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। जिले की ग्राम पंचायतों में गठित स्वच्छता और स्वास्थ्य समितियां भी सक्रिय नहीं हैं। घरों के आस-पास जल भराव, नालियों में गंदगी, पानी के सड़ने से मच्छरों का लार्वा पैदा होता है। अगर इसको लेकर जागरूकता हो तो स्थिति में सुधार हो सकता है।
नेशनल वेक्टर बॉर्न डिसीज प्रोग्राम की रिपोर्ट के तहत मलेरिया के मामलों में देश में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर रहा है। प्रदेश के जिलों की बात करें तो बरेली पहले और बदायूं दूसरे नंबर पर है। इसके बाद मलेरिया के सीजन में स्वास्थ्य विभाग ने पहले से गांव-गांव हेल्थ कैंप लगाने शुरू कर दिए थे। संदिग्ध रोगियों की जांच भी शुरू कर दी गई। ज्यादा मामले मिलने की एक वजह स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता भी है। अब और ज्यादा तैयारियों के साथ मलेरिया से लड़ा जाएगा।
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- डॉ. अनिल शर्मा, एसीएमओ/नोडल अधिकारी
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