संविदा पर रखे जाने वाले डॉक्टरों की नियुक्ति में खेल के बाद स्वास्थ्य विभाग में अब एक और गड़बड़झाला उजागर हुआ है। ताजा मामला राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम में 19 पैरामेडिकल वर्कर की संविदा पर तैनाती का है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हुईं इन नियुक्तियों में अनुबंध शर्तों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। पीएमडब्लू के 19 पदों के लिए 26 और 27 मार्च को साक्षात्कार हुए। साक्षात्कार में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सूची 31 मार्च को जारी कर दी गई। इस सूची को सेहत महकमा दो महीने तक दबाए रखा। मई में पीएमडब्लू को संविदा नियुक्ति आदेश दिया गया। नियमानुसार पीएमडब्लू को एक सप्ताह के भीतर ज्वाइन करना था।
स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रहे कार्यक्रमों में गड़बड़ियां नई बात नहीं है। अब तक कई घपले उजागर हो चुके हैं। अब एनएचएम के तहत विभाग में संविदा पर हुईं पीएमडब्लू की नियुक्तियों में खेल सामने आया है। 19 पदों के लिए 31 मार्च को अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। चयनित अभ्यर्थियों की सूची अधिकारी दो महीने तक दबाए रहे। नियमानुसार नियुक्ति होने के एक सप्ताह के भीतर चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित सीएचसी-पीएचसी पर ज्वाइन करना था। इनको मई में ज्वाइन कराया गया। अनुबंध में भी हेरफेर किया गया है। पहले भी स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर एनएचएम के तहत हुईं नियुक्तियों पर सवाल उठ चुके हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप में सीएमओ पर गिर चुकी है गाज
बदायूं। सीएमओ डॉ. दीपक सक्सेना के खिलाफ शासन स्तर से भ्रष्टाचार के आरोप में गाज गिर चुकी है। शासन ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए हैं। उनके खिलाफ सरकारी सेवक नियमावली 1999 की धारा-7 के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पद से हटा दिया गया। हालांकि सीएमओ डॉ. सक्सेना ने अब तक चार्ज नहीं छोड़ा है। अभी हाल में संविदा डॉक्टर्स की नियुक्ति में खेल के आरोप भी उप लग चुके हैं। डीएम ने इस मामले की जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं।
ये हैं नियम
- नियम मासिक मानदेय पर तैनात किए गए संविदा कर्मियों को नियमित कर्मियों की भांति सप्ताह में छह दिन अथवा नियत रोस्टर के अनुसार काम करना होगा।
- उक्त संविदा कर्मी बिना किसी विशिष्ट कारण अथवा बिना सूचना के अपनी ड्यूटी से एक सप्ताह तक अनुपस्थित रहता है तो संविदा स्वत: समाप्त मानी जाएगी।
- संविदा नियुक्ति का अनुबंध 31 मार्च 2015 तक के लिए है। अनुबंध का नवीनीकरण केवल कार्य और आचरण की संतोषजनक रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
यह गंभीर बात है। सूची जारी होने और ज्वाइनिंग में दो महीने का वक्त क्यों लगा इसकी जांच कराई जाएगी। अगर कहीं पर कोई गड़बड़ी हुई है, तो कड़ी कार्रवाई होगी।
-शंभूनाथ, डीएम
बदायूं से इस तरह की काफी शिकायतें आ रही हैं। साक्षात्कार और सूची जारी होने के बाद ज्वाइनिंग में ज्यादा वक्त नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अगर ऐसा हो रहा है तो यह नियम और नीति के विरुद्ध है। इसकी जांच कराई जाएगी।
-डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ