बदायूं। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष इशितयाक अली, राकेश कुमार रस्तोगी, सदस्य स्वदेश कुमारी ने मां व बच्ची की बीमा धनराशि प्राप्त करने की याचिका को खारिज कर दिया है। आदेश दिया है कि बीमा धनराशि की एफडी बनाई जाए। जब बच्ची की आयु इक्कीस वर्ष पूर्ण हो, तब उसे धनराशि सौंप दी जाए। तब तक वह अपनी दादी के संरक्षण में रहेगी।
उसावां कस्बे के वार्ड नंबर एक की रहने वाली सारिता गुप्ता ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। कहा कि उसके पति की मौत हो चुकी है। उनकी बीमा पॉलिसी की दो लाख रुपये की धनराशि उसको दिलाई जाए। क्योंकि वह असली हकदार है। बीमा कंपनी में कई बार जाने के बाद भी धनराशि नहीं दी गई।
वरिष्ठ शाखा प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम आवास विकास कॉलोनी व सास माया देवी के खिलाफ वाद दायर कर धनराशि की मांग की गई। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष व सदस्यों ने मामले को सुना और वादिनी के वाद को खारिज कर दिया। आदेश दिया कि उसके पति विक्की गुप्ता की भारतीय जीवन बीमा निगम बदायूं से नमिता उसकी मां धनदेवी हैं। वारिस बच्ची अंशिका है।
अदालत ने मायादेवी को व बीमा कंपनी को आदेश दिया कि बीमा धनराशि दो लाख रुपये की एफडी बच्ची अंशिका के नाम की जाए। दादी धनदेवी संरक्षक के रूप में रहेंगी। जिससे अंशिका की उम्र 21 साल पूरी होने पर धनराशि अंशिका को मिल सके।