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Budaun News: खेतों में लहलहा रही मटर की फसल, जल्द आएगी बाजार में

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कुबेर सिंह, किसान
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उझानी। सर्दियों के इस मौसम में सब्जियों के राजा आलू को भले ही गोभी और टमाटर का साथ मिल जाए, लेकिन बिना मटर के साथ के जायका नहीं आता। इस बार भी जिले में मटर की फसल खूब हुई है। डेढ़ से दो सप्ताह बाद मटर की फसल बाजार में आने लगेगी। बताते हैं कि बदायूं, कासगंज की मटर का जायका दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इसलिए यहां की मटर की मांग ज्यादा है। हालांकि अभी जिले के बाजार में मोहनपुरा और उत्तराखंड की हल्द्वानी मंडी से मटर आ रही है।
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बाजार में इन दिनों कच्ची मटर उपलब्ध है। वह अगेती फसल की पैदावार है। मटर की अगेती फसल के लिए बोआई सितंबर के अंतिम सप्ताह में हो गई थी, जो कि दिसंबर से बाजार में आने लगी है। अगेती फसल से जुड़े किसानों की मानें तो इसका रकबा काफी कम है। पैदावार कम होने के कारण किसान अगेती फसल की तरफ ज्यादा गौर नहीं करते।
बदायूं जिले में सहसवान, बिसौली, उझानी, दातागंज और अलापुर आदि इलाकों में मटर की खेती है। बोआई अक्तूबर के दूसरे सप्ताह के करीब हुई है। इन इलाकों की मटर आने में अभी डेढ़- दो सप्ताह इंतजार करना होगा। कासगंज के मोहनपुरा और हल्द्वानी की मंडी से बाजार में जो मटर आ रही है, वह हाइब्रिड की है।
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हाइब्रिड मटर में दाने तो ज्यादा होते हैं, लेकिन वो स्वाद नहीं होता, जो देशी में होता है। बदायूं जिले में गंगा, रामगंगा के अलावा सोत और महावा नदी हैं, जो मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि कर फसल को बेहतर और उत्पाद को जायकेदार बना देती हैं। मटर चूंकि रवि की फसलों का हिस्सा है, सो 135 दिन में फसल पक जाने पर पैदावार भी अच्छी होती है। इस बार जिले में 46 हेक्टेयर में ही मटर है।

मटर की काशी, संवृद्धि और प्रिया प्रजाति जायकेदार
मटर की पांच-छह प्रजातियों की जिले में बोआई की जाती है। इन प्रजातियों में काशी, संवृद्धि, अर्का, प्रिया का स्वाद काफी अच्छा है। करीब 80 दिन में ये मटर तैयार हो जाती है। दाल में इस्तेमाल होने वाली मटर की प्रजातियों में पंत मटर- 195, आईपीएफडी- 16 से अच्छी पैदावार होती है। दोनों प्रजातियों की मटर की पैदावार प्रति हेक्टेयर 20 क्विंटल रहती है, जो 130 दिन में पक जाती हैं।

बीमारियों से ऐसे करें बचाव
माहुं कीट मटर की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। मौसम में नमी के दौरान अगर धूप नहीं खिले तो माहुं पत्तियों को चूस लेता है। इसके अलावा लीफ माइनर कीट मटर की पत्तियों और फलियों के अंदर पहुंचकर नुकसान पहुंचाता है। फली में सुरंग भी बना लेता है। इससे बचाव के लिए इमीडाक्लोपिड या थायोमिथाक्सम 100 ग्राम को दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर फसल में छिड़काव करना बेहतर साबित होता है।


किसान बोले- छुट्टा पशुओं के कारण कम कर रहे हैं खेती
मटर की खेती के प्रति रुझान कम हो गया है। एक तो पैदावार कम रहती है, उस पर फसल की रखवाली भी करनी पड़ती है। रात में रखवाली नहीं करें तो छुट्टा जानवर फसल उजाड़ देते हैं। इसलिए इसकी पैदावार किसान घटा रहे हैं। - कुबेर सिंह, किसान


मंडी में इन दिनों मोहनपुरा और उत्तराखंड से मटर आ रही है। बदायूं जिले के किसान तो दो-चार ही आते हैं। मोहनपुरा की मंडी में कासगंज, एटा और हाथरस से भी मटर पहुंचती है। अपने क्षेत्र की मटर भी जल्द आने लगेगी।- अमर सिंह, थोक व्यापारी

जिले की मिट्टी मटर के लिए काफी अनुकूल है। दाल के रूप में इस्तेमाल किए जाने के लिए किसान मटर की फसल को ज्यादा तरजीह देते हैं। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

कुबेर सिंह, किसान

कुबेर सिंह, किसान

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