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Budaun News: कड़ाके की ठंड में सांस के मरीज बढ़े

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जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
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बदायूं। कड़ाके की ठंड ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी है। बदलते मौसम का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ठंड के कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या तो घटी है, लेकिन जो अस्पताल पहुंच रहे हैं उनमें सांस और गले के संक्रमण वाले मरीज सर्वाधिक हैं। इन दिनों 100 से अधिक मरीज गले में संक्रमण और करीब 100 मरीज सांस संबंधी बीमारियों के ही आ रहे हैं।
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बच्चों में लंबे समय तक खांसी रहने के कारण और नाक बंद होने के कारण सांस लेने में लोगों को परेशानी आ रही है। मरीज की स्थिति के अनुसार चिकित्सकों ने सांस के मरीजों को नेबुलाइजर का प्रयोग कर भाप लेने की सलाह दी है। इस कारण बाजारों में दवा की दुकानों पर भाप की मशीन की मांग भी बढ़ रही है।

ओपीडी में आने वाले मरीजों में हर चौथा व्यक्ति सांस की समस्या से ग्रस्त है। सांस लेने में परेशानी से पीड़ित मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्ग और बच्चों की है। चिकित्सकों ने कई मरीजों को भर्ती भी किया है। चिकित्सकों के अनुसार, श्वसन नली सिकुड़ने और सीने में कफ जमा होने के कारण मरीजों को सांस लेने में परेशानी आती है। कई मरीज दवा लेकर घर जाकर स्वयं की नेबुलाइजर मशीन से भाप ले रहे हैं।
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सिर ढककर निकलें, रक्तचाप रखें नियंत्रित
ठंड में रक्तचाप के मरीजों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। डाॅ. अलंकार सोलंकी ने बताया कि शरीर का तापमान सामान्य रखें। रक्तचाप नियंत्रित रखें। नियमित चेकअप कराते रहें। चिकित्सक द्वारा जो दवा दी गईं हैं उस दवा की डोज को संशोधित कराते रहें। इसके अलावा जब सुबह सोकर उठें तो तुरंत बाहर न निकलें।


ऐसे करें बचाव
अस्थमा, हृदय के मरीज ठंड के साथ ही धुएं से दूरी बनाएं। सोने से दो से ढाई घंटे पहले पौष्टिक सुपाच्य भोजन कर लें, पानी हल्का गुनगुना करके पीएं, शरीर में पानी की कमी न होने दें, हरी सब्जियों के साथ फलों का भी करें सेवन।



मरीज बोले- रात में सांस लेने में हो रही परेशानी
सर्दी बढ़ने के साथ सांस की समस्या से परेशान हैं। रात में दिक्कत होने से बेचैनी हो रही है। इसी को लेकर जिला अस्पताल में दवा लेने आए हैं। -चंद्रपाल, आंमगांव

जब तक दवा का असर रहता है तब तक सांस लेने में दिक्कत नहीं होती। असर खत्म होते ही परेशानी बढ़ जाती है। डॉक्टर को दिखाने कई दिन से आ रहे हैं। -मीरा, मोगर, गौटिया

जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद

जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की लाइन। संवाद

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