फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुनील के परिवार को तमाम उम्र का गम दे गया पंचायत चुनाव

विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कई सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों के परिवार को ऐसा गम दे गया जो वह तमाम उम्र भुला नहीं पाएंगे। किसी के सिर से मुखिया का साया उठा गया तो किसी की मां से उसका बेटा हमेशा के लिए बिछुड़ गया। ऐसा ही एक परिवार शिक्षक सुनील कुमार का है जो चुनाव ड्यूटी के दौरान बीमार हुए और 26 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन

शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी सुनील कुमार विज्ञानानंद रामनारायण वैदिक इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। उनकी ड्यूटी पंचायत चुनाव में इस्लामनगर ब्लॉक में लगी थी। 19 अप्रैल को चुनाव कराने के बाद वह जब घर पहुंचे तो वह काफी थके हुए थे। हल्का बुखार भी आ रहा था। इस पर पत्नी मंगलेश ने उन्हें चाय दी। थकान ज्यादा होने से उन्होंने खाना नहीं खाया और सो गए। सुबह सुनील को तेज बुखार आ रहा था। ऐसे में उन्हें प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया तो दिन भर तबीयत ठीक रही।
21 अप्रैल की शाम को फिर तबीयत खराब होने लगी, सांस लेने में दिक्कत आने लगी। ऐसे में परिजन उन्हें बरेली ले गए। रात साढ़े आठ बजे बरेली पहुंचने के बाद वह बेड के लिए कोविड अस्पतालों के चक्कर कटते रहे, लेकिन उन्हें बेड नहीं मिल पा रहा था। बमुश्किल बरेली में एक निजी कोविड अस्पताल में रात दो बजे के बाद में सुनील को भर्ती कराया गया। 26 अप्रैल को उनकी मौत हो गई है। निजी अस्पताल की रिपोर्ट में उन्हें कोरोना संदिग्ध माना गया।
विज्ञापन

बच्चों को सरकारी नौकरी करते हुए देखना था सपना
सुनील कुमार ने कभी अपनी सुख सुविधाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया बल्कि उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षित करने पर विशेष जोर दिया था। यहीं वजह है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनका सपना बच्चों को सरकारी नौकरी करते देखना था। लेकिन उनकी हसरत अधूरी रह गई है। सुनील की तीन बेटी और दो बेटे हैं। सबसे छोटा बेटा ऋषभ हाईस्कूल का छात्र है। उससे बड़े शिवम और पूजा ने बीएससी पास की है। रुचि और रुबी सुपर टेट की तैयारी कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें