हड़ताल की वजह से भर्ती मरीजों को भी हुई परेशानी
संविदा कर्मियों की हड़ताल के बारे में कॉलेज के पूरे स्टाफ को जानकारी थी। इसके चलते मेडिकल कॉलेज में शाम की शिफ्ट में काम करने वाला स्टाफ भी सुबह ही अस्पताल में पहुंच गया। सुबह आठ बजे ड्यूटी की शिफ्ट बदलते ही पूरा स्टाफ तय जगह पर पहुंच गया। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को हुई, क्योंकि आठ बजे के बाद उनकी देखरेख करने वाला कोई भी नर्सिंग स्टाफ वार्ड में तैनात नहीं था। ऐसे में आनन-फानन में जूनियर डॉक्टर्स की ड्यूटी वार्ड में लगाई गई।
अपराह्न बाद काम पर लौटे संविदा कर्मी, तब शुरू हुई ओपीडी
पैरामेडिकल स्टाफ के हड़ताल पर रहने की वजह से दवा काउंटर पर भी सन्नाटा पसरा रहा। अपराह्न करीब दो बजे के बाद खत्म हुई हड़ताल के बाद में ओपीडी खोली गई। इसके बाद डॉक्टर अपने-अपने कक्षों में बैठे और मरीजों को देखना शुरू किया। हड़ताल की वजह से काफी संख्या में मरीज घर भी लौट गए।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अरुण कुमार ने कहा कि आउटसोर्सिंग के 250 कर्मचारियों को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। इसको लेकर उच्चाधिकारियों से लेकर ठेकेदार से भी बात की गई है। जल्द ही स्टाफ को मानदेय मिल जाएगा। अपराह्न बाद से सभी कर्मियों के काम पर लौटने से स्वास्थ्य सेवाएं बहाल हो गईं।