बदायूं। महिला अस्पताल में एक रिटायर्ड कर्मचारी को ही बाबू बना दिया गया। उसे रिटायर्ड हुए करीब दस माह हो चुके हैं। उसी समय से वह बाबू के रूप में काम कर रहा है। सीएमएस डॉ. रेखा रानी को भी इस बात की जानकारी नहीं है।
कोतवाली क्षेत्र के कटरा आलम शाह पक्का बाग निवासी कृष्णपाल सिंह ने सीएमओ को पत्र सौंपा है। उनका आरोप है कि एक व्यक्ति महिला अस्पताल में तैनात था। वह 31 दिसंबर 2020 को रिटायर्ड हो गया। उस समय से उसे अस्पताल का सारा चार्ज दे दिया गया। डाक रजिस्टर्ड, कैशबुक, पे बिल रजिस्टर, कंटीजेंसी रजिस्टर, डायट रजिस्टर और अन्य कार्य भी दिए गए। उन पर बाकायदा कर्मचारी के हस्ताक्षर हैं। इतना ही नहीं उस रिटायर्ड कर्मचारी से आज भी बाबू के रूप में काम कराया जा रहा है। वह सारे रजिस्टरों पर अपने हस्ताक्षर कर रहा है।
उनका आरोप है कि एक अन्य युवक को भी गलत तरह से नौकरी दी है। उसकी मां वार्ड आया थी। उनकी मृत्यु 2011 में हो चुकी है। उसके पति लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। नियम है कि जब माता पिता दोनों सरकारी सेवा में हों तो उनके आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद उसके बेटे को मृतक आश्रित के पद पर नौकरी दी गई। कृष्णपाल सिंह ने सीएमओ से कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. रेखा रानी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
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इस संबंध में हमारे पास शिकायत आई है। चूंकि ये मामला महिला अस्पताल का है। वहां की इंचार्ज महिला अस्पताल की सीएमएस हैं। उन्हें इस संबंध में कार्रवाई करनी चाहिए। इसके बावजूद हम जांच करा रहे हैं। उसके बाद ही कार्रवाई कराई जाएगी।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ