बदायूं। सम्राट अशोक पर्यटन स्थल (सूर्यकुंड) का पिछले दिनों जिले के नोडल अधिकारी / मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने औचक निरीक्षण किया, तो मंडलायुक्त को वहां पर तमाम कमियां मिलीं। इस पर उन्होंने निर्माणदायी संस्था के अधिकारियों को आड़े हाथों ले लिया। साथ ही निर्माण निगम द्वारा किए गए काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तकनीकी टीम से जांच कराने के निर्देश दिए। जांच टीम ने छोटी-मोटी कमियां निकालकर ठेकेदार से मिलकर अपना कागजी कोरम पूरा कर लिया। अब उसी के अनुसार राजकीय निर्माण निगम द्वारा उन्हीं पुराने कामों पर ही लीपापोती करना शुरू कर दी गई है, ताकि यदि मंडलायुक्त का दोबारा दौरा हो, तो उन्हें सब कुछ सही दिखाई दे।
पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने सपा शासन काल के दौरान ऐतिहासिक सूर्यकुंड के सौंदर्यीकरण को धनराशि दिलायी थी। उस धनराशि से सूर्यकुंड की चहारदीवारी कराई गई। सत्ता परिवर्तन होने के बाद में भाजपा शासन काल में भी करीब 99 लाख रुपये इसके सौंदर्यीकरण को दिए, साथ ही राजकीय निर्माण निगम को इस धनराशि से सूर्यकुंड में रेलिंग, इंटरलॉकिंग के साथ ही पौधरोपण, पार्किंग के अलावा कई और काम कराने के निर्देश दिए। कार्यदायी संस्था ने जिस तरह से यहां पर काम करना शुरू किया, ऐसे में शुरुआत से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर उंगुली उठती रही। क्योंकि कार्यदायी संस्था ने जिन ठेकेदारों को ये जिम्मेदारी दी थी, उन्होंने अपने-अपने तरीके से कार्य को अंजाम दिया और मानक ताक पर रख दिए।
मंडलायुक्त/ जिले के नोडल अधिकारी रणवीर प्रसाद ने 26 नवंबर को सूर्यकुंड का निरीक्षण किया था तो वहां हुए कार्य को देखकर उनका पारा चढ़ गया। नोडल अधिकारी ने इसे सीधे-तौर पर शासकीय राशि का गबन माना। उन्होंने डीएम को इसकी जांच कराने के निर्देश दिए। चूंकि जांच करने वाली टीम स्थानीय थी, ऐसे में उन्होंने जांच में कुछ खास कमियां नहीं दिखायी। टीम के नरम रुख को देखते हुए कार्यदायी संस्था के ठेकेदार के फिर से अपनी मनमानी के हिसाब से उन कमियां की पर लीपापोती करनी शुरू कर दी, ताकि जब नोडल अधिकारी दोबारा इसका दौरा करने तो उन्हें सब ओके मिले।
मामूली बरसात में गिर गई सूर्यकुंड की दीवार
-निर्माण कार्य में की गई अनियमितताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जब मामूली बरसात हुई तो सूर्यकुंड की दीवार गिर गई थी, जिसे दोबारा से बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा सूर्यकुंड में जो हैंडपंप लगे हैं, उनको लगाने में भी अनियमितताएं बरती गईं। यही वजह रही कि वहां पर लगे हैंडपंप लगने के कुछ माह के अंदर ही खराब हो गए, जिसे अब सही कराया जा रहा है।
जगह-जगह बैठ गई इंटरलॉकिंग
कुछ माह पहले यहां जो इंटरलॉकिंग बिछाई गई थी, वह हल्की चहलकदमी के बाद ही बैठना शुरू हो गई। कहीं यह ऊपर तो कहीं नीचे दिखाई देने लगी, जिसे देखने में ही लग रहा था कि इसे लगाने में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। अब इसको अब सही किया जा रहा है।
सूर्यकुंड के निर्माण में जो धनराशि शासन से आवंटित हुई थी, उसका कहीं पर भी दुरुपयोग नहीं किया गया है। कुछ छोटी-छोटी कमियां थीं, उन्हें सही कराया जा रहा है। दो हैंडपंप खराब हो गए थे, उनकी भी मरम्मत कराई जा रही है।
- सतीश पटेल, ठेकेदार, राजकीय निर्माण निगम