लापता बालकों को खोजने के लिए शुरू हुआ ऑपरेशन इस्माइल बदायूं में फ्लॉप होता नजर आ रहा है। जिले में कई साल से 32 बच्चे लापता हैं। लाड़लों की राह ताकते हुए अब तो मां-बाप की आंखें भी पथरा गई हैं। लाड़ला तो दूर गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद कोई खबर तक नहीं आई। ऑपरेशन इस्माइल के तहत पुलिस सात साल में सिर्फ 11 बच्चों को खोज सकी। इनमें तीन की लाशें मिलीं।
2007 में हुए निठारी कांड के बाद लापता बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर खोजने के लिए ऑपरेशन इस्माइल शुरू किया गया था। इसके लिए सूबे के सभी जिलों में अलग से टीमें बनाई गईं। जिले के 21 थानों में सात साल के दौरान 43 बच्चों की गुमशुदगी दर्ज हुई। औसतन हर साल छह बच्चे जिले में लापता हुए। ऑपरेशन इस्माइल के तहत सात साल में सिर्फ 11 बच्चों को खोजकर परिवार से मिलाया जा सका। इस दौरान लापता हुए तीन बच्चों की लाशें पुलिस को मिलीं।
चालू साल के चार महीने में आठ बच्चे लापता हुए। गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस ऑपरेशन इस्माइल के तहत तीन बालकों को खोज चुकी है। एक बच्चे का शव मिला है। इनमें चार बच्चे अब भी लापता हैं। जिले में लापता 32 बच्चों के माता-पिता आज भी उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। गौर करने वाले बात यह है कि लापता बालकों में ज्यादातर की उम्र 10 से 15 साल के बीच है। ऑपरेशन इस्माइल की रफ्तार थमने की वजह से लापता बालकों के परिवार वालों की उम्मीदें भी अब टूटने लगी हैं।
वर्जन-
लापता बालकों को ट्रेस करने के लिए ऑपरेशन इस्माइल के तहत काम किया जा रहा है। काफी बालकों को खोज कर परिवार से मिलाया जा चुका है। उम्मीद है कि बाकी लापता बालकों को भी जल्द खोज लिया जाएगा। -सौमित्र यादव, एसएसपी