बदायूं। प्रदेश के कई जिलों में गरीब अन्न कल्याण योजना के तहत फजीवाड़े के मामले सामने आए हैं। ऐसे में शासन ने जिले के 813 राशनकार्ड धारकों को संदिग्ध मानते हुए जांच के आदेश दिए थे। इसमें 623 लोग अपात्र मिले हैं। खास बात ये रही कि बदायूं में बरेली व अन्य जिलों के रहने वाले 37 लोग गरीबों का राशन डकार रहे थे। इसमें सबसे ज्यादा बरेली के 29 लोग शामिल हैं। राशनकार्ड निरस्त कर दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा गरीब लोगों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते में राशन का वितरण किया जा रहा है। सरकार ने कोरोना काल के दौरान जिले में 45 हजार अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को निशुल्क में राशन वितरण किया। साथ ही चार लाख 70 हजार पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट (कार्ड में दर्ज सदस्यों की संख्या) पांच किलोग्राम के हिसाब से राशन दिया। इसमें तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल व दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं दिया गया। इस दौरान कुछ राशन माफिया सक्रिय हो गए। इन्होंने कोटेदारों समेत संबंधित अधिकारियों से साठगांठ कर कोटे का राशन लेना शुरू कर दिया।
यही हाल प्रदेश के अन्य जिलों का था। यह शिकायतें शासन के पास पहुंचीं तो इसकी नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) की मदद से आधार आईडी मैच की गई। इसमें कई राशन कार्डधारक संदिग्ध मिले। इसकी नामों की लिस्ट शासन ने जिला पूर्ति कार्यालय को दी। इसके बाद इन राशनकार्ड धारकों की जांच की गई। इसमें पाया गया कि 623 राशन कार्ड धारक ऐसे हैं जो अपात्र थे। इनमें से 37 कार्ड धारक ऐसे हैं, जो अन्य जिलों के हैं। इसमें सबसे ज्यादा बरेली जिले के 29 राशनकार्ड धारक थे, साथ ही तीन संभल जिले के हैं, जबकि पीलीभीत, शाहजहांपुर, कासगंज, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर का एक-एक राशन कार्ड धारक शामिल निकला। इस संबंध में डीएसओ रमन मिश्रा ने बताया कि इन लोगों के राशनकार्ड को निरस्त कर दिया है।