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Budaun News: तमिलनाडु, मध्यप्रदेश व पंजाब में बढ़े बदायूं की मक्का के खरीदार

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उझानी मंडी में ट्रक में लोड होती मक्का। संवाद
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उझानी। कृषि उत्पादन मंडी समिति में मक्का की आवक निरंतर बढ़ रही है। प्रतिदिन करीब छह हजार क्विंटल की आवक के बीच इस महीने व्यापारियों ने तीन रैक भी लोड कर पंजाब, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश को भेजी है। प्रत्येक रैक में करीब 26 सौ टन की लोडिंग के अनुमान के बीच अब तक 78 सौ टन मक्का भेजी गई है। इन प्रदेशों में बदायूं की मक्का के खरीदार तेजी से बढ़े हैं।
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मंडी समिति परिसर में मक्का की आवक में इजाफा को लेकर थोक के आढ़ती अमित मित्तल कहते हैं कि पिछले महीने शुरुआती दिनों में आवक कम थी। आवक बढ़ते ही आढ़तों पर सबसे ज्यादा मक्का की तौल हो रही है। बदायूं जिले के अलावा शाहजहांपुर, एटा, कासगंज और फर्रुखाबाद के सीमावर्ती इलाकों के किसान भी उझानी मंडी की ओर रुख कर रहे हैं।
मंडी प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, प्रतिदिन करीब छह हजार क्विंटल मक्का की तौल हो रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार मक्का की गुणवत्ता भी बेहतर है। फिलहाल, बारिश कम होने से मक्का की गुणवत्ता कोई खास प्रभावित नहीं हो पाई है। इस महीने अब तक स्थानीय आढ़तियों की ओर से रेलवे के प्वाइंट से तीन रैकें मध्यप्रदेश के नीमच, पंजाब के जगाधरी और तमिलनाडु में त्रिचूर भेजी गई हैं। कुल मिलाकर इस माह उझानी रैक प्वाइंट से 78 सौ टन मक्का लोड हुई है। जून में दो और रैक अन्य प्रदेशों को भेजे जाने की उम्मीद है।
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सरकारी क्रय केंद्र नहीं खुलने से किसानों को नुकसान
मक्का की खरीद के लिए बदायूं जिले में खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से सरकारी क्रय केंद्र खोले जाने हैं। उझानी मंडी में भी क्रय केंद्र स्वीकृत है, लेकिन अभी अस्तित्व में नहीं आया है। सरकारी खरीद का भाव प्रति क्विंटल 24 सौ रुपये है। क्रय केंद्र के अभाव में किसानों को मंडी में खुले बाजार में करीब दो हजार रुपये क्विंटल के भाव से मक्का बेचनी पड़ रही है। मक्का उत्पादक अहीरवारा निवासी चंद्रपाल ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र नहीं खोले जाने से उत्पादकों को करीब चार सौ रुपये प्रति क्विंटल का आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसे लेकर क्रय केंद्र प्रभारी मुनेंद्र कुमार कहते हैं कि दो-तीन दिन में सभी केंद्रों पर मक्का की खरीद शुरू हो जाएगी।

इथेनॉल व पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल से मक्का का रकबा बढ़ा
पिछले कुछ सालों में मक्का का इस्तेमाल इथेनॉल और पोल्ट्री फीड के रूप में तेजी से बढ़ रहा है। पंजाब में इथेनॉल बनाने की फैक्टरियां अधिक हैं। इथेनॉल में उच्च गुणवत्ता वाली मक्का का इस्तेमाल होता है। मध्यप्रदेश में पोल्ट्री फीड बनाने का काम जोर पकड़ता जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले तीन गुना रकबा में वृद्धि हुई है। जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर रकबा में इस बार हाइब्रिड मक्का हुई है। वैसे, जिले में बरसात के दिनों में बोआई वाली देशी मक्का भी होती है। देशी मक्का की पैदावार हाइब्रिड के मुकाबले काफी कम होने से किसानों का इस ओर रुझान भी कम रहता है।
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