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Budaun News: गंगा में डूबे किशोर का नहीं लगा सुराग

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कछला गंगा घाट। संवाद
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उसहैत। थाना क्षेत्र के गांव लीला नगला स्थित गंगा घाट पर बुधवार शाम नहाते समय किशोर डूब गया था। बृहस्पतिवार सुबह से लेकर देर शाम तक गोताखोर गंगा में किशोर की तलाश करते रहे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। इससे परिवार व ग्रामीण देर शाम तक गंगा घाट पर डटे रहे।
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उसैहत थाना क्षेत्र के गांव खेड़ा जलालपुर निवासी राजपाल का बेटा मंजेश (9) बुधवार शाम चार बजे करीब गांव के ही पांच बच्चों के साथ पड़ोस के गांव लीला नगला स्थित गंगा घाट पर गर्मी के चलते नहाने गया था। नहाते समय मंजेश गंगा में डूब गया था। शाम को परिजनों को जब घटना की जानकारी हुई तब गांव के ही गोताखोरों की मदद से किशोर की गंगा में तलाश कराई गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा।
बृहस्पतिवार सुबह परिवार के लोग गांव के ही गोताखोरों को बुलाकर गंगा किनारे पहुंचे। यहां पुलिस को भी सूचना दी गई, लेकिन पुलिस दोपहर बाद पहुंची। इस दौरान गोताखोरों ने करीब एक किलोमीटर तक गंगा में किशोर की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। शाम छह बजे तक गंगा में तलाश चलती रही। अंधेरा होने की वजह से तलाशी बंद कर दी गई। किशोर के गंगा में लापता होने से परिवार के लोगों में कोहराम मचा है।
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बड़े स्तर पर निगरानी की कमी के कारण गंगा में डूब रहे लोग
यदि प्रशासन वॉच टावर बनाकर कर्मचारियों से स्नानार्थियों की निगरानी कराए तो घट सकते हैं हादसे
संवाद न्यूज एजेंसी
कछला। अगर, देखा जाए तो गंगा घाट पर पुराने पुल के पिलर्स के पास की गहराई स्नानार्थियों के काल का कारण बन रही है। अब तक कई श्रद्धालु इन्हीं पिलर्स के पास गहराई में डूब चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। न ही इस स्थान को अब तक प्रशासन ने स्नान के लिए प्रतिबंधित ही किया है। डीएम और एसएसपी स्नान पर्वों से पूर्व व्यवस्थाएं तो देखने आते हैं, लेकिन डूबने का मुख्य कारण यहां के वाशिंदों से नहीं पूछा जाता।
स्थानीय गंगा घाट के नाविक राजकुमार का कहना है कि पिलर्स के आसपास की गहराई लाेगों के डूबने का बड़ा कारण है। बदायूं से आए श्रद्धालु ओमप्रकाश कश्यप बताते हैं कि यदि प्रशासन वॉच टावर बनाकर कर्मचारियों से स्नानार्थियों की निगरानी कराए तो हादसों में कमी आ सकती है। वहीं घाट के प्रसाद विक्रेताओं में गोविंद और छविराम का कहना है कि चुनिंदा मुख्य घाटों पर ही स्नान कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा साउंड सिस्टम से प्रतिबंधित स्थानों पर स्नान के लिए जाने वालों को रोकने के लिए निरंतर एनाउंस होता रहना चाहिए। लगातार चेतावनी देकर भी हादसों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा पुराने पुल के पिलर्स के पास गंगास्नान को पूर्णतया प्रतिबंधित कर देना चाहिए। पिलर्स के पास रस्सी और जंजीर से बैरिकेडिंग करा देना चाहिए।

पानी कम होने पर बढ़ जाती हैं पिलर्स के पास घटनाएं
गंगा में जब कम पानी होता है, तब डूबने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वजह है कि कम पानी होने के कारण लोग गंगा में दूर-दूर तक घूमकर नहाते हैं। स्वाभाविक रूप से गंगा की धाराएं जगह-जगह गहरे गड्ढे बना देतीं हैं। अगर कोई व्यक्ति इन प्राकृतिक गड्ढों तक पहुंच गया तो उसका डूबना निश्चित होता है। इसके लिए नाविकों अथवा गोताखोरों से डूब क्षेत्रों की जांच पड़ताल करवाते रहना भी प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। विगत वर्ष कम पानी में ही डूब क्षेत्र में बदायूं के राजकीय मेडीकल कॉलेज के पांच एमबीबीएस छात्रों की डूबकर मौत हो चुकी है।

कछला गंगा घाट। संवाद

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