बदायूं (म्याऊं)। पिछले साल बाढ़ में डूबने वाले दातागंज क्षेत्र के 10 गांवों में इस बार में तबाही देखने को मिल सकती है। कारण यह है कि प्रशासन ने इन गांवों के दस हजार लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कोई काम नहीं किया। डूब क्षेत्र बताकर पल्ला झाड़ लिया और प्रस्ताव तक नहीं बनाया। ऐसे में ग्रामीण डरे हुए हैं।
दातागंज तहसील क्षेत्र के हजरतपुर से रामगंगा नदी निकली हुई है। इस नदी के किनारे बसे नवादा बदन, गढ़िया पैगंबरपुर, मौजमपुर, शेरपुर, हर्रामपुर, जस्तौली, सिमरिया, सकतपुर, मौसमपुर धुबले गांव के किसान बड़ी संख्या में खेतीबाड़ी करते हैं। हर साल नदी का पानी उफनाता है तो गांवों में पांच फुट तक पानी भर जाता है।
इस वजह से लोगाें के अपने घर खाली करके दूसरी जगहों पर जाना पड़ता है। हर्रामपुर निवासी अतर सिंह, जमादार और गजेंद्र का कहना है कि हजरतपुर पुल से लेकर हर्रामपुर तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क पर पांच से छह फुट तक पानी भर जाता है। इससे नवादा बदन, गढ़िया पैगंबरपुर, मौजमपुर, शेरपुर, हर्रामपुर, जस्तौली, सिमरिया, सकतपुर जैसे गांवों का जिला मुख्यालय और हजरतपुर कस्बे से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया। जब बाढ़ आती है, तब अधिकारी पहुंचते हैं, थोड़ी बहुत राहत सामग्री का वितरण करते हैं और आश्वासन देकर लौट जाते हैं। उनका कहना है कि यदि हजरतपुर पुल से हर्रामपुर तक की सड़क को ऊंचा कर दिया जाए, तो बाढ़ के समय क्षेत्र के लगभग 10 गांवों को काफी राहत मिलेगी।
शेखपुर में मोटरसाइकिल समेत डूब गया था युवक
पिछले साल शेखपुर के पास भरे पानी में मोटरसाइकिल समेत युवक डूब गया था। उसकी मौत हो गई थी। इसी तरह दो वर्ष पहले हजरतपुर क्षेत्र में बाढ़ आई थी। इसका असर गढ़िया पैगंबरपुर और नवादा बदन गांव में देखने को मिला था। पानी ने गांवों को चारों ओर से घेर लिया था। इसमें डूबकर दो बच्चों की मौत हो गई थी।
सरकारी स्टीमर का इंतजार करते हैं लोग
क्षेत्र के शमशाद, अजमेरी, डब्ले, नूर मोहम्मद, आतिम और मोहम्मद कैफ बताते हैं कि बाढ़ आने पर सभी लोग घरों में कैद हो जाते हैं। सब्जी, राशन और अन्य जरूरी सामान के लिए सरकारी स्टीमर का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि गांव के पास एक पुलिया तो बनाई गई है, लेकिन उससे कोई विशेष राहत नहीं मिलती।
खेती-किसानी भी हो जाती है चौपट
ग्रामीणों ने बताया कि वे अधिकतर भूमिहीन हैं। बटाई या पेशगी पर खेती करते हैं। बाढ़ आने पर उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे आर्थिक संकट और गहराता है।
जिले में गंगा नदी पर बचाव के कार्य किए गए हैं। रामगंगा नदी पर बचाव का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया है। शासन से निर्देश मिलेंगे तो कार्य कराया जाएगा। दातागंज क्षेत्र के कई गांव डूब क्षेत्र में बसे हुए हैं। इस वजह से वहां पानी भर जाता है।
-नेशपाल, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड
ये है ग्रामीणों की मांग
हजरपुर पुल से हर्रामपुर तक एक किमी तक सड़क ऊंची की जाए।
शेरपुर गांव की पुलिया को ऊंचा किया जाए।
फसल का मुआवजा मालिकों न देकर बटाईदार को दिया जाए।
रामगंगा नदी में पानी बढ़े तो प्रशासन के लोग गांव वालाें को सूचना दें, ताकि उनका गृहस्थी बच सके।
हजरतपुर से हर्रामपुर को जाने वाली टूटी पड़ी सड़क। संवाद