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Budaun News: किसी के घर में नहीं जला चूल्हा, पड़ोसियों ने रखा बच्चों का ख्याल

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कछला में शवयात्रा से पहले बिलखती महिलाएं। संवाद - फोटो : धर्मेंद्र त्यागी
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उझानी। कछला में डालचंद्र के घर के आंगन में राजकुमारी के साथ पुत्रवधू गंगाश्री और सरला के शव के साथ ही उनके परिवार के लोगों की पूरी रात खुली आंखों में कट गई। छोटे बच्चों का पड़ोसियों ने ख्याल रखा। उनके लिए कोई चाय-बिस्कुट तो कोई खाना लेकर पहुंचा, लेकिन गमगीन माहौल में बच्चे भी खाना नहीं खा पाए। गमगीन माहौल में महिलाओं और उनके अपनों को बिलखता देख परिवार के अन्य बुजुर्ग लोग भी गमजदा नजर आए।
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मुरावन नगला निवासी डालचंद्र के घर पत्नी राजकुमारी और पुत्रवधू गंगाश्री और सरला के शव पहुंचे तो कोहराम मच गया। बुधवार देर रात तक सांत्वना देने के लिए आने-जाने वालों का तांता लगा रहा। इसी तरह प्रेमी देवी के घर भी उनके परिजनों को ढाढ़स बंधाने के लिए लोग पहुंचे। पड़ोस की महिलाओं ने मृतकों के घरों में खाना पहुंचाया। बच्चों ने तो थोडा- बहुत खा लिया, लेकिन बड़ों के गले रोटी नहीं उतर पाई। भोजराज ने बताया कि आंगन में तीन शव रखे हों तो कौन खाना खा पाएगा। भोजराज और उनके भाइयों में राजू, वीरपाल और कुंवरपाल ने चाय जरूर पी, लेकिन खाना परिवार के बच्चों की ओर बढ़ा दिया। सुबह में भी कमोबेश ऐसा ही माहौल रहा। राजकुमारी, गंगाश्री और सरला का दसवां संस्कार भी गंगाघाट पर दाह संस्कार के बाद कर दिया गया, लेकिन प्रेमा और रेवती के घर तो दसवां होने तक चूल्हा नहीं जलेगा। संवाद


मृतकों के घरों के आसपास रहा पुलिस का पहरा
उझानी। पोस्टमार्टम के बाद कछला में महिलाओं के शव उनके घर पहुंचे तो कोतवाली और चौकी पर तैनात दरोगा समेत कई पुलिस कर्मी पहुंच गए। पुलिस कर्मियों ने हालात पर नजर रखी। शवयात्रा से लेकर दाह संस्कार तक पूरे रास्ते और गंगाघाट पर भी सीओ सुनील कुमार सिंह और प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार के साथ पुलिस फोर्स नजर आया।
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