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200 साल से संगीत के आसमान पर चमक रहा रामपुर-सहसवान घराना

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बदायूं। संगीत का जिक्र आए और रामपुर- सहसवान घराने का नाम न लिया जाए यह मुश्किल है। करीब दो सौ साल से संगीत के आसमान पर चमक रहे रामपुर- सहसवान घराने के संगीतकारों को अब तक नौ प्रतिष्ठित पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण पुरस्कार मिल चुके हैं। पिछले दिनों संगीत घराने के उस्ताद राशिद खां को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा था।
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उस्ताद राशिद खां अब परिवार के साथ कोलकाता में रह रहे हैं, लेकिन उनके घराने के बड़ी संख्या में लोग बदायूं में भी हैं। रामपुर-सहसवान घराने से जुड़े संगीतकार देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत को समृद्ध करने का काम कर रहा है। 1971 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित उस्ताद निसार हुसैन खां के नाती उस्ताद दानिश हुसैन बदायूंनी बताते हैं कि घराने की नींव करीब दो सौ साल पहले उस्ताद इनायत हुसैन खां ने रखी थी। वह रामपुर नवाब के यहां संगीतकार थे। वहां से नेपाल नरेश उनको साथ ले गए। घराने के संगीतकार बरेली की खानकाहे नियाजिया से जुड़े रहे हैं।
तीन दिन पहले राजस्थान के राज्यपाल की ओर से राजभवन में आयोजित संगीत कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे उस्ताद दानिश हुसैन बदायूंनी ने बताया कि घराने के उस्ताद मुश्ताक हुसैन खां को पहला पद्मभूषण पुरस्कार 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने दिया था।
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इसके बाद उस्ताद निसार हुसैन खां को 1971 में पद्मभूषण पुरस्कार मिला। 1991 में उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां को पद्मश्री और इसी साल उस्ताद हफीज अहमद खां को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उस्ताद निसार हुसैन खां के शार्गिद उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां को 2006 में पद्मभूषण, 2018 में पद्मविभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इनके अलावा उस्ताद गुलाम सद्दीक खां को 2005 में पद्मश्री और उस्ताद राशिद खां को 2006 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उस्ताद निसार साहब के ही शागिर्दों में उस्ताद राशिद खां हैं उनको 2022 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है। निसार हुसैन खां के दामाद उस्ताद हफीज अहमद खां को 1991 में पद्मश्री पुरस्कार मिला। वह ऑल इंडिया रेडियो के डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर व खैरागढ़ विवि के वाइस चांसलर भी रहे।
घराने के सरफराज हुसैन खां, जुल्फिकार हुसैन खां, इफ्तखार हुसैन खां हफीज अहमद रजा खां समेत कई बड़े नाम हैं जिनका नाम संगीत की दुनिया में पूरी दुनिया में मशहूर है।
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घराने के संगीतकार देश भर में फैला रहे कला
उस्ताद दानिश हुसैन बदायूंनी ने बताया कि रामपुर- सहसवान घराने से जुड़े गुलाम नियाज खां, मुजाहिद हुसैन, शाहवाज खान, आफताब अहमद देश भर में भारतीय संगीत की अलख जला रहे हैं। मौजूदा दौर में सूफी संगीत के साथ शास्त्रीय संगीत का चलन बढ़ा है। दानिश हुसैन बदायूंनी भी भारत के कोने कोने में प्रस्तुति दे चुके हैं। वह बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका, इरान, इंग्लैंड की यात्रा भी कर चुके हैं।
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