बदायूं। बेटी अंशू और बेटे अंकित की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां कुंती बार-बार मेरे बच्चों का नाम लेकर बेसुध हो जा रही थी। पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे पिता प्रेमपाल दहाड़े मारकर अपने जिगर के टुकड़ों को पुकारते नजर आए। मां ने रोते बिलखते बताया कि बेटा-बेटी चाय के साथ दो-चार पूड़ी ही खाकर स्कूल गए थे। आकर खाने की बात कहकर लंच भी नहीं ले गए। वह घर में लंच बनाकर बच्चों का इंतजार करती रही लेकिन मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गई।
गांव कांकसी निवासी प्रेमपाल पर दो बेटे व तीन बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी अंशु थी। इसके बाद रजनी, अंकित, ज्योति व सबसे छोटा बेटा कुलदीप है। अंशू, अंकित और रजनी नगला चोई के स्कूल में पढ़ते थे। तीनों भाई बहन एक ही साइकिल से स्कूल जाते थे। इसी स्कूल में पढ़ने वाली उनकी तहेरी बहन खुशबू अन्य बच्चों के साथ पैदल या किसी की साइकिल से जाती है। सोमवार किसी वजह से रजनी स्कूल नहीं गई। इसलिए खुशबू को अंशू ने साइकिल पर बैठा लिया। खुशबू गंभीर रूप से घायल है। उसका दायां पैर घुटने के पास से टूट गया है। उसके अंगूठे और चेहरे में खरोंच आ गई है।
मां कुंती ने बताया कि रविवार को तीज के पर्व के चलते घर में पूड़ी-सब्जी बनी थी, सब्जी तो खत्म हो गई थी। लेकिन पूड़ी रह गई थी। सुबह छह बजे तक बच्चों को यह नहीं पता था कि उन्हें स्कूल जाना है। इस वजह से वह बच्चों के लिए खाना नहीं बना पाई थी। जब बच्चों को स्कूल खुलने की जानकारी हुई तो वह अचानक नहाकर तैयार हो लगे। घर में रखी पूड़ी व चाय पीकर बच्चे चले गए थे। दोनों बोलकर गए थे स्कूल से लौटने के बाद खाना खाएंगे, मम्मी दाल-चावल बना लेना। इस वजह से अंकित व अंशु टिफिन भी नहीं ले गए, लेकिन मां-पिता को क्या पता था कि अब उनके बेटे-बिटिया घर नहीं लौटेंगे। हादसे से गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार में चीख पुकार मची है।
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ई-रिक्शा चलाकर बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का रहा प्रयास
सहसवान। अंशु व अंकित के पिता प्रेमपाल सिंह ई-रिक्शा चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। ग्रामीण इस बात की भी चर्चा कर रहे थे कि सीमित आय और पांच बच्चे होने के बावजूद प्रेमपाल अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वह अपने तीनों बच्चों को निजी विद्यालय में भेजते थे, लेकिन नियति को शायद यह रास नहीं आया और उसने एक हादसे में उनकी बेटी व बेटे को छीन लिया।
हादसा स्थल से दो मीटर दूर घनी झाड़ियों में गिरी थी अंशु
हादसे के बाद सड़क के एक किनारे घायल अवस्था में पड़ी खुशबू और दूसरी तरफ घास में पड़े अंकित को सीएचसी पहुंचाया। साथ ही सड़क पर पड़ी साइकिल और बच्चों की कापी किताबें को एकत्र कियया गया। इसी दौरान गांव से बच्चों के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि साइकिल पर तीन बच्चे सवार थे। इसके बाद तलाश किया गया तो अंशु सड़क से कुछ दूरी पर झाड़ियों में पड़ी मिली। उसे भी अस्पताल पहुंचाया गया तो डॉक्टर ने अंशु और अंकित को मृत घोषित कर दिया।
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अस्पताल में नहीं चला पंखा, खुशबू का रोकर हुआ बुरा हाल
जिला अस्पताल के हड्डी रोग वार्ड में भर्ती खुशबू के बेड के ऊपर लगा पंखा खराब है। इस वजह से वह नहीं चल रहा था। उसके पिता महिपाल हाथ वाला पंखा लेकर आए थे। उन्होंने बगल के बेड में भर्ती मरीज से पंखा लेकर खुशबू को किया। इस दौरान वह अपने भाई और बहन की मौत को सोच-सोच कर रो रही थी।
डीएम का आदेश मानते तो बच जाते बच्चे
-दो बच्चों की मौत के बाद में शिक्षा विभाग संबंधित स्कूल प्रबंधन को नोटिस देने की बात कह रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जब डीएम अवनीश राय ने स्कूलों को बंद करने का आदेश था तो प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग के जिलास्तर से लेकर तहसील व ब्लॉक स्तरीय अधिकारी क्या कर रहे थे। दरअसल, जिले के अधिकारी से लेकर कर्मचारी डीएम के आदेश को कोई तवज्जो नहीं दी। अगर वह डीएम के आदेश को मानते तो शायद इन दोनों बच्चों की मौत नहीं होती।
पोस्टमॉर्टम हाउस पर बिलखते बच्चों के पिता व चाचा। संवाद
पोस्टमॉर्टम हाउस पर बिलखते बच्चों के पिता व चाचा। संवाद
पोस्टमॉर्टम हाउस पर बिलखते बच्चों के पिता व चाचा। संवाद