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Budaun News: बंदर और कुत्ते लोगों को बना रहे निशाना, एबीसी केंद्र फाइलों में

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शहर में सड़कों पर घुमते कुत्ते। संवाद - फोटो : एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन
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बदायूं। सर्दी के मौसम में जिले में कुत्तों और बंदरों की संख्या और उनकी आक्रमकता दोनों तेजी से बढ़ रही है। शहर के रिहायशी इलाकों, बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास आए दिन लोगों को काटे जाने की घटनाएं सामने आ रहीं हैं। बावजूद इसके संबंधित विभाग समस्या के निस्तारण को लेकर गंभीर नहीं। वहीं नगर पालिका को अपने क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर खोलने की जगह नहीं मिली। पत्राचार जारी है।
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शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कुत्तों का टीकाकरण, नसबंदी और उनके लिए शेल्टर होम की व्यवस्था की जाए, लेकिन नगर पालिका की कार्यप्रणाली इन निर्देशों पर खरी नहीं उतर रही। पालिका अधिकारी जमीन न मिलने का हवाला देकर कार्रवाई टाल रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि जमीन तलाशने की प्रक्रिया फाइलों और बैठकों तक ही सीमित है।
सिविल लाइन निवासी महेश सक्सेना, रूपेश सिंह का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पालिका की टीमें मौके पर नहीं पहुंचती। जिन इलाकों में कुत्तों का आतंक ज्यादा है, वहां कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। न तो नियमित रूप से कुत्तों को पकड़ा जा रहा है और न ही उनकी नसबंदी कराई जा रही है। कोई योजना न बनने से समस्या दिन-व-दिन गंभीर होती जा रही है। बता दें कि बिल्सी इलाके में भी कई गांवों में कुत्तों का आतंक है। यहां कुत्तों के काटने से 50 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
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नेकपुर निवासी प्रमोद कुमार, सुरेश का कहना है कि बंदरों का आतंक भी बढ़ रहा है। वह कपड़े ले जाते है, घराें के अंदर घुस आते हैं। इससे महिलाओं और बच्चों में दहशत का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही नगर पालिका बोर्ड की बैठक में बंदरों को पकड़वाने का मुद्दा रखा जाएगा।

एबीसी सेंटर के लिए डेढ़ एकड़ जमीन की मांग
नगर पालिका को अपने क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर खोलने की जगह नहीं मिली। इसके बाद नगर पालिका की ओर से एसडीएम को पत्राचार किया गया, जिसमें उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन की मांग की है। अगर जमीन मिल जाती है तो उसी में कुत्तों के लिए एबीसी सेंटर खोला जाएगा। विभाग के अनुसार, वहां उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। ठीक होने के बाद उन्हें उसी जगह छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इससे उनकी आबादी और आक्रामकता कम हो जाती है।

अस्पताल पहुंच रहे तीन सौ तक पहुंच रहे मरीज

जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 200 से 250 लोग रोजाना कुत्ते और बंदर के काटने से संबंधित मामलों के आ रहे हैं, जिन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है। कभी-कभी कुत्ता, बंदर काटने के मामले 300 की संख्या पार कर जाते हैं। डॉ. अलंकार सोलंकी का कहना है कि ठंड के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और खतरा बढ़ जाता है। वहीं, फार्मासिस्ट इम्तियाज का कहना है उनके पास पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज इंजेक्शन मौजूद है।

यह करें प्राथमिक उपचार
धोना : घाव को तुरंत खूब सारे साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस (लार) निकल जाता है।
खून रोकना : यदि खून बह रहा हो तो साफ कपड़े से हल्का दबाव डालकर खून रोकें।
एंटीसेप्टिक : धोने के बाद घाव पर एंटीसेप्टिक लोशन (जैसे बीटाडीन) लगाएं।
ढकना : घाव को एक साफ पट्टी या कपड़े से ढक दें।
घरेलू उपचार से बचें : हल्दी, मिर्च पाउडर या कोई घरेलू पेस्ट न लगाएं। इससे संक्रमण बढ़ सकता है।

-लोग बोले- बंदर व कुत्तों का आतंक चरम पर

बंदरों का आतंक चरम पर है। खासतौर पर कचहरी में बहुत ज्यादा बंदर हैं, जो यहां आने वाले लोगों पर हमला तक कर देते हैं। जो वाहन खड़े होते हैं उनकी सीट, बैग आदि को फाड़ देते हैं। बैग में रखा सामान निकालकर ले जाते हैं। - पवन गौतम, अधिवक्ता


नेकपुर में अब बंदरों का दखल बढ़ गया है। घरों के अंदर से सामान उठाकर ले जाते है। बच्चों को अकेले छत पर भेजने में डर लगता है। क्योंकि वह हमला कर देते हैं। दिन तो दिन रात में भी घरों की छतों पर बंदर बैठे रहते हैं। -ओम, नेकपुर


कुत्तों के लिए एबीसी सेंटर बनाने के लिए जमीन तलाशी जा रही है। नगर पालिका क्षेत्र में जमीन नहीं मिलने से एसडीएम से जमीन दिलाने की मांग की गई है। बंदरों को पकड़ने के लिए बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड के निर्णय लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ, बदायूं

शहर में सड़कों पर घुमते कुत्ते। संवाद- फोटो : एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन

शहर में सड़कों पर घुमते कुत्ते। संवाद- फोटो : एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन

शहर में सड़कों पर घुमते कुत्ते। संवाद- फोटो : एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन

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