जिला महिला अस्पताल में मरीजों की जांच कर दवाएं देती डाॅक्टर। संवाद
बदायूं। लगातार बढ़ रही गलन और सर्द हवा ने गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ठंड की चपेट में आकर कई गर्भवती निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और गंभीर श्वसन संक्रमण की शिकार हो रहीं हैं। इसका सीधा असर न सिर्फ मां की सेहत पर पड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल में इन दिनों सांस से जुड़ी शिकायतों के साथ आने वाली गर्भवतियों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डाॅक्टरों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है। खासतौर पर तीसरे त्रैमास (आखिरी तीन महीने) में यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचि गुप्ता का कहना है कि तेज ठंड और ठंडी हवा से गर्भवती को निमोनिया हो जाए तो ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे गर्भस्थ शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका परिणाम कम वजन के बच्चे का जन्म, समय से पहले प्रसव या अन्य जटिलताओं के रूप में सामने आ सकता है।
डॉ. रबिया बेगम ने गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्हें सुबह-शाम ठंडी हवा से बचने, गर्म कपड़े पहनने, पर्याप्त गर्म तरल पदार्थ लेने और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। साथ ही सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने को कहा गया है।