दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे, अब तक नहीं ली प्रशासन ने सुध
जिले में 250 से ज्यादा गांवों में हर साल कहर बरपाती है बाढ़
बाढ़ नियंत्रण के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। किसानों की मदद के लिए बारिश आने के कई महीने पहले से योजनाएं बनती हैं। मगर बाढ़ आने पर हर साल किसान ठगे रह जाते हैं। पसीना बहाकर तैयार की फसल गंगा में बाढ़ आने पर एक झटके में बर्बाद हो जाती है। मदद के नाम पर कोई अधिकारी तक मौके पर नहीं पहुंचता। यहां गंगा और रामगंगा के तटवर्ती 250 से ज्यादा गांवों के किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।
इस साल भी बाढ़ का सीजन चालू हो चुका है। दातागंज, सहसवान और सदर तहसील के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्र होने के साथ कटान की वजह से गंगा में समा चुकी है। बाढ़ खंड और प्रशासन ने अब तक इन गांवों की सुध नहीं ली है। दातागंज तहसील के गांव चेतराम नगला, कोनका नगला, जटा, असमया रफतपुर, बझेरा, कमलू नगला, कदम नगला, कमलइयापुर टापू बने हुए हैं। सहसवान तहसील के गांव भमरौलिया, परौटी, परशुराम नगला, खागी नगला, वीरसहाय नगला, चौकीदार की मढ़ैया में भी हालात गंभीर हैं। फसलों और जमीन के साथ पालतू जानवरों को लेकर भी किसान परेशान हैं।
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बदायूं गंगा के बांध
नगला अजमेरी 16.5 किमी
गंगा महावा 34.9 किमी
चंदनपुर हुसैनपुर 17.5 किमी जोरी नगला 8.0 किमी
उसहैत 17.0 किमी
उसावां 10.5 किमी
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कुल लंबाई 104.4 किमी
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बदायूं में बाढ़ चौकियां
तहसील सदर- 7
तहसील बिल्सी- 5
तहसील बिसौली-5
तहसील सहसवान-7
तहसील दातागंज- 17
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कुल चौकियां- 41
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मुआवजा तो दूर कोई सुध भी नहीं लेता
बाढ़ की वजह से किसानों की फसलें हर साल नष्ट होती हैं। मुआवजा तो दूर कोई सुध भी नहीं लेता। इस समय भी करीब 50 बीघा फसल बाढ़ में डूबी हुई है। गांव में अब तक कोई मदद नहीं पहुंची है।
- बेचे लाल, पूर्व प्रधान सुंदरायन
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बाढ़ से निपटने के इंतजाम नाकाफी
अगर बाढ़ से निपटने के इंतजाम ठीक हों तो किसानों की यह हालत न हो। हर साल बाढ़ आती है, इसके बावजूद पहले से व्यवस्थाएं नहीं की जाती हैं। धान, गन्ना, बाजरा और मक्का की फसलें हर साल बर्बाद हो जाती हैं।
-मुशाकिर, ककोड़ा
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15 बीघा जमीन गंगा में समा गई
करीब 15 बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। इससे पहले भी काफी किसानों की जमीनें गंगा निगल चुकी हैं। अब तक किसी को मुआवजा नहीं मिला है। जिन किसानों की फसलें नष्ट होती हैं, उनको भी कभी मुआवजा नहीं मिलता।
- प्रेम सिंह, देवकली
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15 बीघा जमीन गंगा में समा गई
यह पहली बार नहीं है कि बाढ़ की वजह से नुकसान हुआ है। हर साल बाढ़ की वजह से किसानों की कमर टूट जाती है। मुआवजा कभी नहीं मिलता। राहत के नाम पर आटा, चावल और मिट्टी का तेल दे दिया जाता है।
- सालिगराम
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वर्जन-
बाढ़ प्रभावित गांवों का सर्वे कराया जाता है। सर्वे के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाता है। इस समय भी बाढ़ का सीजन है। हालात पर नजर रखी जा रही है। जिन किसानों का नुकसान हुआ होगा उनको मुआवजा दिया जाएगा।
-एके श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन