बदायूं। जिला योजना में 2021-22 में दुग्ध विकास विभाग की 278.95 लाख की कार्ययोजना को अनुमोदन मिला था। अनुमोदन के सापेक्ष दुग्ध विकास विभाग को वित्तीय वर्ष में 240.27 लाख का बजट स्वीकृत हुआ। विभाग ने इसमें 226.80 लाख रुपये खर्च भी किए, लेकिन इसके बाद भी पशुपालकों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ।
बिसौली रोड स्थित दुग्ध अवशीतन प्लांट बंद होने के कारण जिले के पशु पालक दुध उत्पादकों को विशेष लाभ नहीं हुआ। उनको अपना दूध कम दामों पर ही बेचना पड़ रहा है।
जिले में 11 लाख महिषवंशीय व 2.79 लाख से ज्यादा गोवंशीय पशु हैं। अप्रैल से अगस्त तक दुग्ध उत्पादन कम होता है, लेकिन सितंबर से मार्च तक दूध का उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है। गौर करने वाली बात यह है कि दुग्ध अवशीतन प्लांट की क्षमता 60 हजार लीटर प्रतिदिन से ज्यादा की है, लेकिन यहां औसतन 12 से 15 हजार लीटर दूध ही पहुंच रहा है। दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिला योजना में मिले बजट से दुग्ध उत्पादकों के साथ दूध कलेक्शन में लगाए गए वाहनों के भुगतान के साथ अन्य आवश्यक मदों में भी खर्च किया जाता है। इधर, लगातार घाटे में जा रहे विभाग और कबाड़ में तब्दील हो रहे दुग्ध अवशीतन प्लांट को लेकर अधिकारी ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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जिले में 130 से ज्यादा दुग्ध समितियां, ज्यादातर निष्क्रिय
दुग्ध विकास विभाग के अधीन जिले में 130 से ज्यादा दुग्ध समितियां हैं, लेकिन इनमें कुछ ही समितियां सक्रिय हैं। तमाम संसाधन होने के बाद भी दुग्ध विकास विभाग घाटे में जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण दूध के परिवहन पर आने वाला खर्च है। दुग्ध विकास विभाग जिले में समरेर-दातागंज, नई सड़क-म्याऊं, भूड़ा भदरौल, उझानी, बिल्सी और बिसौली के नौली हरनाथपुर तक दुग्ध वाहनों से इस दूध को बिसौली रोड स्थित गांव सिलहरी के पास दुग्ध अवशीतन केंद्र में एकत्र करता है और बाद में यहां से बरेली भेज दिया जाता है। लगातार घाटे के कारण अवशीतन केंद्र की मशीनें कबाड़ हो गई हैं। ऐसे में पशु पालकों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा।
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कई साल पहले बरेली से अटैच कर दिया गया बदायूं
चंदौसी रोड स्थित दुग्ध अवशीतन केंद्र करीब एक दशक पहले ही बंद हो गया है। प्लांट में अब सिर्फ दूध कलेक्शन का काम हो रहा है। ऐसे में कई साल पहले प्लांट को बरेली से अटैच कर दिया गया है। पहले यहां दूध से अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाते थे लेकिन अब दूध से अन्य उत्पाद बरेली प्लांट में ही तैयार किए जाते हैं। बरेली में तैयार उत्पादों को बाद में बिक्री के लिए बदायूं लाया जाता है। जिले में कई स्थानों पर डेयरी पार्लर भी खोले गए थे, लेकिन अब बंद हो गए हैं।
दुग्ध विकास विभाग की अपेक्षित रवैया के बीच जिले में निजी दूध कंपनियों की जड़ें लगातार मजबूत हो रही हैं।
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जिला योजना 2021-22 में मिले 240.27 लाख के सापेक्ष दुग्ध उत्पादकों को भुगतान, वाहनों के भुगतान व अन्य विभागीय मदों में करीब 226.80 लाख खर्च किए गए। बदायूं का दुग्ध अवशीतन प्लांट बरेली से संबद्घ है। हम यहां दूध कलेक्शन करने के बाद बरेली भेज देते हैं। जिले में 130 से ज्यादा दुग्ध उत्पादक समितियां काम कर रही हैं। जिले में पांच रूटों से दूध का कलेक्शन किया जा रहा है। अलापुर और गिल्टैया में मिल्क कूलर के जरिए भी दूध एकत्र किया जा रहा है।
-डीपी सिंह, दुग्ध विकास अधिकारी