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अधिकतर स्कूलों में बच्चों को नहीं मिल पा रहा दूध, तहरी के नाम पर भी पीले चावल

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पटियाली सराय का प्राथमिक विद्यालय। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। हर बुधवार को बेसिक स्कूलों में एमडीएम के तहत बच्चों को दूध और तहरी दिए जाने की योजना है, लेकिन यह जिले में पूरी तरह फ्लाप साबित हो रही है। सरकारी आंकड़े भले ही कुछ बयां करते हों, लेकिन हकीकत उसके उलट ही है। अधिकतर स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं पिलाया जा रहा है तो तहरी के नाम पर भी पीले चावलों से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में मिड डे मील व्यवस्था चरमरा रही हैै। बुधवार को कई स्कूलों में जाने पर असलियत सामने आई।
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शहर के प्राथमिक विद्यालय पटियाली सराय में प्रधानाध्यापक सरिका मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 138 बच्चे हैं। बुधवार को इनमें 87 बच्चे आए थे। जब उनसे दूध वितरण के बारे में पूछा गया तो वह हिचक र्गइं। बोलीं- आठ लीटर दूध मंगाया था, जिसका वितरण कर दिया गया है, जबकि अधिकतर बच्चों का कहना था कि उन्हें दूध नहीं मिला है।
ब्लॉक सालारपुर के प्राथमिक विद्यालय मुद्दीननगर में भी बच्चों को दूध नहीं दिया गया था। वहां के प्रधानाध्यापक अमित अग्रवाल ने बताया कि स्कूल में नियमित तौर पर दूध का वितरण किया जाता है लेकिन बुधवार को दूध के लिए काफी प्रयास किया गया था, वह नहीं मिल सका था। इस कारण दूध का वितरण नहीं हो सका।
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कुंवरगांव। क्षेत्र के गांव कसेर गटाईया के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक मौके पर नहीं थीं। वहां पर तैनात मिलीं सहायक अध्यापक भीमलता ने बताया कि प्रधानाध्यापक किसी बैठक में गई हैं। तहरी का वितरण किया गया है, जबकि दूध न होने की बात कही गई। यहां तहरी के नाम पर भी केवल पीले चावल ही थे।
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सिर्फ प्राथमिक विद्यालय बिनावर में बंटता मिला दूध
बिनावर। प्राथमिक विद्यालय बिनावर में प्रधानाध्यापक यीयुक्श कुमार सिंह मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि स्कूल में 371 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन मौके पर 150 उपस्थित थे। इनको दूध का वितरण किया गया है। उन्होंने बताया कि दूध की व्यवस्था प्रधान के स्तर से की गई है। प्रत्येक बच्चे को 100 मिली दूध दिया गया है।
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ये है स्कूूलों का मेन्यू-
सोमवार- रोटी, सोयाबीन/दाल की बड़ी युक्त सब्जी व फल
मंगलवार- चावल-दाल
बुधवार- तहरी व दूध (प्राथमिक में 150 मिली व जूनियर में 200 मिली प्रति बच्चा)
गुरुवार- रोटी-दाल
शुक्रवार- तहरी
शनिवार- चावल सोयाबीन युक्त सब्जी
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शासन स्तर से जो चीजें बच्चों को निर्धारित की गई है, उनको वह मिलनी चाहिए। अगर शिक्षक स्तर से नहीं दी जा रही है तो इसकी जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
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