बदायूं। कोरोना काल में लेवल टू अस्पताल बनाकर कोरोना रोगियों का इलाज करने वाला राजकीय मेडिकल कॉलेज ओमिक्रॉन जैसी नई चुनौती से निपटने के लिए भी तैयार है। कोविड के नए वैरिएंट को लेकर दोबारा से मेडिकल कॉलेज में गतिविधियां शुरू हो गई हैं। अब एक वार्ड को ओमिक्रॉन संदिग्ध मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। स्टाफ को पहले से ज्यादा एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कोरोना काल में राजकीय मेडिकल कॉलेज में पॉजिटिव मरीजों को भर्ती किया गया। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान यहां पर एल-2 श्रेणी की सुविधाएं मरीजों को दी जाने लगीं। ऐसे में यहां सामान्य मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता था। हालांकि पॉजिटिव मरीजों को लिए अलग से वार्ड आरक्षित किए गए थे। हालात सामान्य होने पर यहां पर कोविड-19 के लिए आरक्षित वार्ड सैनिटाइज करके आम मरीजों के लिए खोले गए थे। पिछले कुछ समय से कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की आहट सुनाई देने लगी है। इसको लेकर राजकीय मेडिकल प्रशासन अपनी तरफ से तैयारियां करने में लगा है। ऐसे में ओमिक्रॉन को लेकर कॉलेज में अलग से एक वार्ड को आरक्षित कर दिया गया है। साथ ही अन्य तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
पीपीई किट की करेंगे खरीदारी
कोरोना काल के दौरान अधिकांश जरूरी चीजों को खरीद लिया गया था। इस समय सभी संसाधन व उपकरण हैं। हालांकि पीपीई किट की कमी दिखाई दे रही है। इसकी खरीदारी की जाएगी। साथ ही कुछ अन्य चीजें कम होंगी तो उनकी भी खरीद की जाएगी।
ऑक्सीजन की नहीं होगी दिक्कत
कोरोना काल की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा दिक्कत ऑक्सीजन की हुई थी। उस दौरान अन्य जिलों से ऑक्सीजन को मंगवानी पड़ती थीं। क्योंकि यहां ऑक्सीजन प्लांट नहीं थे पर अब ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं होगी। यहां पर स्थापित ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह से चालू हैं। उनसे ही ऑक्सीजन मरीजों को सप्लाई की जा रही है। दूसरे जिलों से ऑक्सीजन सिलिंडर अब नहीं मांगने पड़ रहे हैं।
600 से 700 हो रही है रोजाना जांच
राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्थापित बीएसएल लैब-2 में इस समय 600 सौ सात से जांचें रोज की जा रही हैं। कॉलेज प्राचार्य के अनुसार अगर जरूरत पड़ती है तो जांच की संख्या में जरूरत के हिस्सा से इजाफा कर दिया जाएगा।
ओमिक्रॉन का कोई भी केस जिले में नहीं है। फिर भी अपने स्तर से तैयारी की गई है। यहां पर पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अगर शासन या जिला प्रशासन स्तर से कोई निर्देश मिलता है तो उसके अनुरूप काम किया जाएगा।
- डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज