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चुनावी रंजिश में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य की गोली मारकर हत्या

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राम दयाल। फाइल फोटो - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। चुनावी रंजिश में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रामदयाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह सुबह टहलने निकले थे। शाम को गांव के पास खेत में उनका शव मिला। मौके पर पहुंची पुलिस को घरवालों के गुस्से का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि गुमशुदगी दर्ज करने में पुलिस ने टालमटोल की। काफी देर तक नोकझोंक होती रही। बाद में एसपी सिटी और सीओ के समझाने पर शव को उठाने दिया गया। इस मामले में पत्नी मीना देवी की तहरीर पर मुकेश और इंद्रपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
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बसोमा निवासी रामदयाल (52) रोज की तरह मंगलवार सुबह टहलने निकले थे। दो-तीन घंटे बाद घर नहीं लौटे तो परिवार ने खोजबीन शुरू कर दी। गांव समेत आसपास इलाके में उनका सुराग नहीं लग पाया। दोपहर में पत्नी मीना और बेटे गौरव ने कोतवाली पहुंचकर रामदयाल के लापता होने की जानकारी दी। गुमशुदगी दर्ज करने की मांग की पर पुलिस ने टाल दिया।
इधर, शाम साढ़े चार बजे बच्चों ने गांव के पास प्रताप ठाकुर के बाजरे के खेत में शव पड़ा देखा तो शोर मचा दिया। सूचना पर उनके परिवार वाले और काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। वहां रामदयाल का शव पड़ा था, जिसके सीने पर गोली लगी थी और पास ही एक तमंचा पड़ा था। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। प्रभारी निरीक्षक समेत पुलिसकर्मियों को देख मृतक के घरवालों ने हंगामा कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और घरवालों के बीच काफी नोकझोंक हुई। घरवाले रिपोर्ट दर्ज होने से पहले शव न उठाने की मांग पर अड़ गए। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को भी रामदयाल पर जानलेवा हमला हुआ था। लेकिन पुलिस ने हल्के में लिया।
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बाद में एसपी सिटी प्रवीण कुमार चौहान और सीओ गजेंद्र सिंह ने मृतक के घरवालों को समझा बुझाकर शव सील कराया। सीओ ने बताया कि अभी तहरीर नहीं मिली है, तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज होगी।
बेटों ने कहा- पुलिस ऐक्शन में आ जाती तो न जाती जान
रामदयाल के परिवार वालों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बेटों का कहना कि 27 जुलाई को जब उनके पिता पर जानलेवा हमला हुआ तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में करीब आठ दिन लगा दिए। इसके बाद नामजद लोगों की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इससे हमलावर बेखौफ हो गए। उसी का नतीजा रहा कि मंगलवार को हत्या कर दी गई।
छोटे भाई राजवीर ने बताया कि पुलिस ने जानलेवा हमले के बजाय मारपीट की धाराओं में गांव के मुकेश पुत्र प्रेमपाल और इंद्रपाल पुत्र रामभरोसे और एक अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। एससी एक्ट भी लगा लेकिन नामजदों की गिरफ्तारी नहीं की गई। गिरफ्तारी नहीं होने के बाद खुद रामदयाल ने पुलिस के सामने पेश होकर जानमाल का खतरा बताया।
मंगलवार सुबह पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य की गुमशुदगी को लेकर कार्रवाई के मामले में बेटे गौरव और पत्नी मीना देवी ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। बकौल मीना- वह बेटे के साथ गुमशुदगी की तहरीर देने कोतवाली पहुंचीं तो एक पुलिस कर्मी ने खोजबीन करने की सलाह देकर टरका दिया।
हत्या के पीछे पंचायत चुनाव के दौरान की रंजिश बताई गई है। मीना ने बताया कि रामदयाल और उसके घरवालों ने मुकेश और इंद्रपाल के कहने पर उनकी पसंद के प्रत्याशी को वोट नहीं दिए थे। तभी से दोनों रंजिश मानने लग गए थे। इससे पहले रामदयाल करीब एक दशक पहले क्षेत्र पंचायत सदस्य थे।
शव के पास मिला तमंचा, करीब से मारी गई गोली
रामदयाल टहलने के लिए पहले भी बसोमा से रेलवे लाइन के पास आते-जाते थे। मंगलवार को भी वह उसी रास्ते पर गए। उनके सीने पर काफी करीब से गोली मारी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि काफी हद तक संभव है कि हमलावर उन्हें खींच कर खेत में ले गए। गोली मारने के बाद तमंचा मौके पर ही फेंक कर भाग गए।
पापा को हर हाल में मारना चाहते थे
मृतक रामदयाल के बेटे अनूप, गौरव और सौरभ शव मिलने के बाद काफी गुस्से में दिखे। अनूप ने बताया कि जुलाई में पापा पर हमला हुआ था। उसके बाद पुलिस अगर नामजदों को गिरफ्तार कर जेल भेज देती तो उनके पिता की हत्या नहीं होती। खुलेआम घूम रहे हमलावर उसके पिता को हर हाल में मारना चाहते थे।
मृतक के परिजन ने जिन लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है, उनकी तलाश के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस की दो टीमें खोजबीन में लगाई गई हैं। आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्हें सजा दिलाने के लिए पुलिस ठोस सबूत जुटाएगी।
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- गजेंद्र सिंह, सीओ
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