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रिफिलिंग के धंधे में पूर्ति विभाग का खेल, माफिया बाहर नौकर को भिजवाया जेल

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बदायूं। शहर से सटे गांव लौड़ा बहेड़ी में पकड़े गए सिलिंडरों में आखिर पूर्ति विभाग ने खेल कर ही दिया। इस मामले में नौकर को ही मुख्य आरोपी बनाकर उस माफिया को साफ बचा लिया गया, जिसकी सरपरस्ती में यह काला धंधा चल रहा था। सिविल लाइंस पुलिस ने सोमवार को रसोई गैस रिफिलिंग के धंधे में आरोपी बनाए गए गैस माफिया के नौकर श्याम अरोड़ा को जेल भेज दिया। पूर्ति विभाग ने रविवार को बतौर आरोपी श्याम अरोड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन ‘माननीय’ के दखल के चलते पूर्ति विभाग एफआईआर में रसोई गैस माफिया को बचा गया। रसोई गैस के गोरखधंधे में गैस गोदामों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर बरामद 240 सिलिंडर कहां से आए और यह सिलिंडर किसके हैं।
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शुक्रवार शाम बिल्सी रोड स्थित गांव लौड़ा बहेड़ी में गैस रिफिलिंग के साथ एक झोपड़ी में आग लग गई थी। सूचना पर फायर ब्रिगेड और सिविल लाइंस पुलिस मौके पर पहुंची। यहां रसोई गैस रिफिलिंग के बड़े गोरखधंधे का खुलासा हुआ। आस-पास के तीन घरों से 240 घरेलू और कामर्शियल रसोई गैस सिलिंडर बरामद हुए थे। इनमें 93 भरे और 147 खाली सिलिंडर थे। मामले में एफआईआर पूर्ति विभाग को दर्ज करानी थी। बरामद सिलिंडर भी पूर्ति विभाग ने कब्जे में ले लिए थे, लेकिन माननीय के दबाव में दो दिन एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। दरअसल, माननीय मोहल्ला खंडसारी निवासी रसोई गैस माफिया को बचाना चाहते थे। इसमें वह कामयाब भी हो गए। रविवार को पूर्ति विभाग ने लीपापोती करते हुए गैस माफिया के नौकर श्याम अरोड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। सोमवार को उसे जेल भेज दिया गया। नौकर के जेल जाने के बाद भूमिगत रसोई गैस माफिया को सोमवार को अपनी दुकान पर भी देखा गया। खुद को बचाने के लिए यह माफिया लगातार माननीय के गुर्गों से संपर्क बनाए हुए था। इधर, सिलिंडरों को लेकर गैस गोदामों की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। पूर्ति विभाग भी साफ नहीं कर पा रहा कि इतनी बड़ी तादाद में सिलिंडर कहां से आए।
पुलिस विवेचना में सामने आ सकते हैं कुछ नाम
- रसोई गैस रिफिलिंग मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। अगर पुलिस विवेचना बिना किसी दबाव के होती है तो जाहिर है कि गैस माफिया का नाम विवेचना में सामने आ सकता है। माफिया ने पुलिस विवेचना में उसका नाम उजागर न हो इसके लिए अभी से तैयारी करनी शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस ओपी गौतम का कहना है कि विवेचना में जो भी नाम सामने आते हैं उनको चार्जशीट में शामिल किया जाएगा। गैस गोदामों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
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बैठक की बात कहकर टाल गए डीएसओ
- सोमवार को डीएसओ रामेंद्र प्रताप सिंह से जब इस मामले की बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह बैठक में हैं, और इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। कुल मिलाकर इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
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