बिसौली। नगर के एक इंग्लिश स्कूल परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। समापन दिवस पर कथावाचक पं. रविकांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के पावन विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचक शास्त्री ने कहा कि रुक्मिणी विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति, अटूट विश्वास और भगवान पर पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जब भक्त सच्चे मन से प्रभु को पुकारता है तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं। रुक्मिणी का प्रेम, त्याग और विश्वास आज के समाज को भी आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर राम भूषण गुप्ता, आचार्य सौरभ पाठक, यशवर्धन रस्तोगी, वंश वार्ष्णेय, शिवांश रस्तोगी, रामेंद्र शर्मा, संजय सक्सेना, राकेश सक्सेना रहे।
कौशल्या और श्रीराम से जुड़े दिव्य प्रसंग सुनाए
बिसौली। नगर के हरी बाबा मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पं. देशपाल भारद्वाज महाराज ने माता कौशल्या और भगवान श्रीराम के दिव्य प्रसंग का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जो मानव रूप में रहकर आदर्श पुत्र, भाई और राजा बने। कथा के दौरान उन्होंने उस प्रसंग का वर्णन किया। जब माता कौशल्या ने बालक राम को पालने में सुलाकर भोग लगाया। आश्चर्य तब हुआ जब उन्होंने राम को एक साथ पालने में भोग लगाते देखा। भगवान ने अपनी लीला दिखाते हुए मुख खोला, जिसमें माता कौशल्या ने संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन किए। सूर्य, चंद्रमा, तारे, पृथ्वी, देवता और स्वयं को राम के मुख में देखकर वे भाव-विभोर हो गईं। संवाद