बदायूं। गर्मी का पारा चढ़ते ही बिजली की मांग बढ़ गई है। लोड बढ़ने से लाइनों में फॉल्ट और ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाएं भी बढ़ गईं हैं। ऐसे में 11 केवी और एलटी लाइन पर शटडाउन लेकर काम करने वाले लाइनमैनों की जिंदगी हर दिन दांव पर लग रही है। वहीं अधिकारी पूरे सुरक्षा उपकरणों के साथ काम कराए जाने का दावा कर रहे हैं।
जिले में 57 विद्युत उपकेंद्रों पर करीब 750 लाइनमैन अधूरे सुरक्षा उपकरणों के ही क्षेत्र में जाकर काम कर रहे हैं। हर साल लाइनमैनों के साथ कोई न कोई घटना हो जाती है। इस वर्ष 17 अप्रैल को धिमरपुरा में एक प्राइवेट कर्मी की करंट लगने से मौत हो गई थी। करंट की चपेट में आने से कर्मी का सिर धड़ से अलग होकर गिर गया था। इस घटना के बाद न तो विद्युत निगम की ओर से सबक लिया गया न ही लाइनमैनों ने सेफ्टी के साधन का उपयोग शुरू किया।
निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि एक विद्युत उपकेंद्र पर 10 कर्मचारी लगे हुए हैं, जबकि उपकेंद्र पर सुरक्षा उपकरणों के एक या दो सेट ही मौजूद हैं। ऐसे में वह बिना सुरक्षा उपकरण के ही जाकर क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब तक विद्युत उपकेंद्र पर कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से डिस्चार्ज रॉड, टेस्टेड ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और जूते हर उपकेंद्र पर नहीं पहुंचते, तब तक शटडाउन भी लाइनमैन के लिए मौत का शटडाउन बना रहेगा।
बताया कि सुरक्षा उपकरणों की बात करने पर विद्युत कर्मियों को अधिकारियों से डांट ही मिलती है। हालांकि निगम के अधिकारियों की ओर से दावा किया जा रहा है कि प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर लाइनमैनों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही अधिकारियों की ओर से उपकरणों का उपयोग कराए जाने को लेकर चेकिंग भी की जा रही है।
-ये छह चीजें हर लाइनमैन के लिए होती हैं अनिवार्य-
1- डिस्चार्ज रॉड, जो लाइन बंद करने के बाद बचे करंट को अर्थ करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है।
2- इंसुलेटेड ग्लव्स, जो लैब टेस्टेड और पूरी तरह पंक्चर मुक्त हों।
3- सेफ्टी बेल्ट और हार्नेस, जो खंभे या टावर से गिरने से बचाए।
4- सुरक्षा हेलमेट जो सिर को चोट और अचानक स्पार्क से बचाता है।
5- इंसुलेटेड प्लास, कटर और टेस्टर, जो आईएसआई मार्का वाला हो।
6- सेफ्टी शूज, जो अर्थिंग और करंट से सुरक्षा दें।
डिस्चार्ज रॉड न होने से कई बार लग चुका है झटका
विद्युत निगम की ओर से भले ही लाइनमैनों को सेफ्टी उपकरणों के साथ मरम्मत कार्य कराने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन ज्यादातर लाइनमैन बिना सुरक्षा उपकरणों के ही कार्य कर रहे हैं। एक लाइनमैन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शटडाउन के बाद भी लाइन में इंडक्शन करंट रह जाता है। डिस्चार्ज रॉड न होने से कई बार झटका लग चुका है। बावजूद इसके अधिकारी सुरक्षा उपकरणों को लेकर सक्रियता नहीं दिखाते।
लाइनमैनों की सुरक्षा को लेकर प्रत्येक उपकेंद्र पर सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं। उपकेंद्रों पर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि बिना सुरक्षा उपकरणों को चेक किए बिना लाइनमैनों को काम पर न भेजा जाए। साथ ही संबंधित अधिकारी से लाइनमैनों को सुरक्षा उपकरण उपयोग कराने के लिए चेकिंग अभियान भी चलाया जा रहा है। कहीं कोई बिना उपकरणों के कार्य कर रहा है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। - अजय कुमार, अधीक्षण अभियंता
कई लाइनमैन गवां चुके हैं जान-
केस - 1
गांव धिमरपुरा में 17 अप्रैल को हाईटेंशन लाइन पर काम करते समय करंट लगने से प्राइवेट कर्मी अरविंद (30 वर्ष) पुत्र रक्षपाल सिंह की मौत हो गई थी। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उसे टी-प्वाइंट के खंभे पर जंपर जोड़ने के लिए चढ़ाया गया था। करंट की चपेट में आने से कर्मी का सिर धड़ से अलग होकर गिर गया था।
केस- 2
वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव धिमरपुरा निवासी प्रेमपाल सिंह प्राइवेट लाइनमैन थे। वह बिजली के संविदा कर्मियों के साथ काम करते आ रहे थे। बीते मंगलवार को वह लाइनमैन नेत्रपाल व रजनीश के साथ बिजली लाइन ठीक करने के लिए आंवला रोड पर गए थे। प्रेमपाल खंभे पर चढ़कर फ्यूज जोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गए।
केस- 3
उसहैत कस्बे में 4 मार्च 2025 को एक माह से जर्जर एलटी लाइन बदलने का काम चल रहा था। क्षेत्र के गांव बछेली निवासी मजदूर पप्पू (25) पुत्र प्रकाश उसहैत कस्बे के वार्ड नंबर दो में विद्युत खंभे पर चढ़कर लाइन बदल रहे थे। इस दौरान करंट लगने से उनकी मौत हो गई थी।
केस- 4
अक्टूबर 2023 कछला के वार्ड 40 निवासी विनोद कुमार स्ट्रीट लाइट ठीक करने के लिए सुबह करीब नौ बजे पोल पर चढ़े थे। इसी दौरान बिजली आ जाने से उन्हें करंट लग गया था। उनका चेहरा समेत दोनों हाथ झुलस गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत होे गई थी।
हरदत्तपुर गांव के पास लाइन ठीक करता लाइन मैन। स्त्रोत पाठक
हरदत्तपुर गांव के पास लाइन ठीक करता लाइन मैन। स्त्रोत पाठक