कमेटी अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा की जानिब से मोहल्ला कुरैशियान, नूरी चौक पर हिंदुस्तान के मशहूर सूफी संत हजरत ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन हसन चिश्ती अजमेरी के 803वें उर्स के मौके पर एक रोजा जलसा बनाम जश्न-ए-ख्वाजा गरीब नवाज बड़ी शान शौकत के साथ मनाया गया। जल्सा का आगाज बाद नमाजे ईशा तिलावते कलाम इलाही से हाफिज रिजवान कुरैशी ने शुरू किया। सदारत जाहिद हुसैन नूरी ने की। इसके बाद नात व मनकवत का सिलसिला चला।
रिजवान कुरैशी ने पढ़ा-
सुनाने अपनी बरबादी के अफसाने कहां जाते,
तेरा दर छोड़कर ख्वाजा यह दीवाने कहां जाते।
अच्छे मियां ने कहा-
उनकी आमद, आमद का हर तरफ उजाला है,
कुफ्र के अंधेरों का दम निकलने वाला हैं।
राशिद मियां ने अपनी बात कुछ इस प्रकार की-
मत भूलना मां-बाप को लालच के माल पे,
मां-बाप जैसी तू दौलत रखना संभाल के।
जाकिर लखनवी ने पढ़ा-
सहरा, जंगल, बियावान में पढ़ो
मीनार गिर पड़ा है तो मैदान में पढ़ो,
ये अहले नुजूमी क्या बताएंगे
कल होने वाला हैं क्या कुरान में पढ़ो,।
शम्स नूरी ने कहा-
ख्वाजा ऐ हिंद वो दरबार हैं आला तेरा,
कभी महरूम नहीं रहता मॉगने वाला तेरा।
वहीं लखनऊ से आए हजरत अल्लामा व मौलाना जाकिर हुसैन मीनाई ने तकरीर पेश करते हुऐ कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन हसन चिश्ती को प्यारे नबी ने विरासत दी मुईन तू मेरे दीन का मुईन हैं। वही मौलाना रहील रजा ने ख्वाजा गरीब नवाज की करामत-ए-बयां की उन्होंने कहा की हमें अल्लाह के नेक बंदो से मुहब्बत करनी चाहिए। सलातो सलाम के बाद कुल की रस्म अदा की गई। जहां कौम व वतन के साथ भूकंप पीड़ित लोगों के लिए दुआ की गई। लंगर व दालिया तस्कीम किया गया।
इस मौके पर चेयरमैन इशरत अली, शाहिद हुसैन, इरफान, कुरैशी, रिजवान, अबरार, इमरान, नाहिद हुसैन आदि शामिल रहे।