बदायूं। प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी बनाया जाएगा। इसी क्रम में विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग (करके सीखना) मॉडल पर आधारित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किया जा रहा है, ताकि बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ हुनर का भी विकास हो सके।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के तहत परिषदीय विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को निर्धारित समय सारणी के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए सोमवार और मंगलवार को अंतिम दो कक्षाएं, कक्षा सात के लिए बुधवार और बृहस्पतिवार को अंतिम दो कक्षाएं और कक्षा छह के लिए शुक्रवार और शनिवार को अंतिम दो कक्षाएं कौशल आधारित गतिविधियों के लिए संचालित की जाएंगी। इन कक्षाओं में छात्रों को विभिन्न ट्रेड्स से संबंधित प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह पढ़ाई के साथ-साथ कार्यकुशलता भी सीख सकें। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों में समस्या समाधान की क्षमता, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास को बढ़ाना है। विद्यालय स्तर पर शिक्षक बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से सिखाएंगे, ताकि सीखना रोचक और प्रभावी बन सके।
इसके साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक माह चारों ट्रेड्स से संबंधित गतिविधियों और प्रैक्टिकल की कम से कम एक-एक जियोटैग फोटो प्रेरणा एप पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाए। इससे कार्यक्रम की निगरानी के साथ-साथ विद्यालयों में हो रही गतिविधियों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा सकेगा।