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आस्था के सैलाब पर भारी पड़ा कासगंज का कोहराम

Wed, 31 Jan 2018 06:30 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
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Kachla ghat
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 माघ पूर्णिमा पर सोमवार को कछला गंगाघाट हर-हर गंगे के उदघोष के साथ श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। तड़के से घाट पर जुटे श्रद्घालुओं ने मोक्षदायिनी में दुग्धाभिषेक किया। बच्चों के मुंडन संस्कार भी कराए गए। हालांकि बदायूं जिले के श्रद्घालुओं की संख्या सर्वाधिक रही लेकिन कासगंज हिंसा की वजह से आगरा,मथुरा समेत राजस्थान के इलाकों से बहुत कम श्रद्घालु पहुंचे। पिछले साल के मुकाबले करीब 30 फीसदी तक श्रद्घालुओं की संख्या में गिरावट के अनुमान के बीच घाट पर वही श्रद्घालु पहुंचे जो ट्रेन में सफर करके आए। 
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कछला गंगाघाट पर तड़के से ही उमड़े लगे श्रद्घालुओं ने चंद्रग्रहण की वजह से सूतक काल शुरू होने से पहले ही स्नान शुरू कर दिया। चंद्रगहण का सूतक काल प्रात: आठ बजकर 15 मिनट से लगा था, सो हजारों की संख्या में श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाकर सूर्यदेव को अर्क दिया। बावजूद इसके सर्वाधिक भीड़भाड़ पूर्वाह्न में ही देखने को मिली। हर-हर गंगे उदघोष के साथ ही गंगा स्नान कर रहे श्रद्घालुओं ने मोक्षदायिनी मं दुग्धाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। घाट पर पूजा-अर्चना का दौर भी चला। अपराह्न तक गंगा स्नान के दौर के बीच श्रद्घालुओं में से कइयों ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार भी कराए। महिलाओं ने घाट पर संकीर्तन भी किया। 
खासकर माघ पूर्णिमा वाले दिन कछला गंगाघाट पर राजस्थान समेत आगरा, मथुरा, हाथरस और कासगंज जिले के श्रद्घालुओं की सर्वाधिक भीड़ नजर आती थी लेकिन कासगंज में हुई हिंसा के बाद पसोपेश के बीच उस ओर के श्रद्घालुओं ने गंगाघाट पर पहुंचने से परहेज किया। स्थानीय अभिसूचना इकाई के एक अनुमान के अनुसार- पिछले साल करीब चार लाख श्रद्घालु पहुंचे थे लेकिन इस बार संख्या तीन लाख के आसपास ही सिमट गई। जो श्रद्घालु ट्रेनों से सफर करके गंगाघाट पर पहुंचे, उनके चेहरों पर कासगंज हिंसा का खौफ नजर आया। ज्यादातर तो स्नान कर वापसी वाली ट्रेनों से गंतव्य की ओर निकल गए। 
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मथुरा के दो किशोर डूबने से बचाए 
उझानी। गंगाघाट पर गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्घालुओं में से पूर्वाह्न में कासगंज के छोर वाले घाट पर मथुरा जिले में राया निवासी एक ही परिवार के तीन सदस्य नहाते समय गहरे में चले गए। उन्होंने बेरीकेटिंग की रस्सी को भी पार कर लिया। नहाते समय ही इनमें 15 वर्षीय अमित और उसका बड़ा भाई जुगल डूबने लगे तो चीख पुकार मच गई। घाट पर मौजूद गोताखोरों ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह देख उनके घरवालों के चेहरे पर रौनक लौट आई। 

पुलिस का ट्रैफिक प्लान फेल, हाइवे पर थमे वाहनों के पहिए 
माघ पूर्णिमा पर भीड़ को लेकर पुलिस और प्रशासन का अनुमान गलत साबित हो गया। पुलिस ने श्रद्घालुओं की संख्या एक लाख के आसपास ही रहने के मद्देनजर श्रद्घालुओं के वाहनों को पुलिस चौकी के पास खाली पड़े मैदान में खड़े कराने का प्लान बनाया था। श्रद्घालुओं की बढ़ती संख्या के साथ वाहनों में इजाफ होता गया और करीब 10 बजे पुल के आसपास जाम लगना शुरू हो गया। करीब आधा घंटे में ही जाम में फंसे वाहनों की संख्या सैकड़ा पार कर गई। इसके बाद तो पुलिस को आवागमन सुचारू कराने में पसीना छूटने लगा। कछला चौराहे से लेकर पुल पार तक वाहनों की कतार लग गई। चश्मदीद लोगों की मानें तो पुलिस ने भारी वाहनों को रोकने में जो चूक की वही जाम की वजह बन गई। जाम में फंसे वाहन सवार महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

नगर पंचायत अध्यक्ष भी पहुंचे घाट पर 
उझानी। श्रद्घालुओं को सुविधा मुहैया कराने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष नरेशपाल यादव और ईओ अशोक गोयल की ओर से इंतजाम कराए गए थे। घाट पर बनाए गए अस्थायी चेंजरूम महिलाओं से खचाखच भरे रहे। ज्यादातर महिलाओं को खुले में ही कपड़े बदलने पड़े। व्यवस्थाओं की हकीकत परखने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष ने घाट पर तीन-चार घंटे बिताए। सफाई कर्मियों को व्यवस्थाएं बनाए रखने में लगाए रखा गया।
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