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Budaun News: धान के पौधों पर कंडुआ की मार, किसान परेशान

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धान की फसल में संक्रमित पौधे दिखाते किसान। संवाद - फोटो : अमर उजाला
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उझानी। बारिश अच्छी होने के बाद भी धान की फसल रोगमुक्त नहीं रह पाई है। खेतों में भरे पानी के बीच धान की बालियां निकलने से पहले पुरवाई चली तो कंडुआ रोग का प्रकोप हो गया है। कंडुआ रोग से धान की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित होगी।
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धान के पौधों में कंडुआ रोग के लक्षण पिछले महीने नजर आने लगे थे। कृषि वैज्ञानिक इसे फॉल्स स्मट तो ग्रामीण इसे हल्दी गांठ या कंडुआ रोग कहते हैं। फफूंद से धान के पौधों में फैलने वाला कंडुआ खराब बीज के इस्तेमाल और हवा से पौधों को संक्रमित करता है। अहिरवारा के किसान चंद्रपाल ने बताया कि इस रोग से गुणवत्ता और पैदावार पर प्रभावित होगी। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि तराई के इलाके में कंडुआ ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जिले के मुकाबले बदायूं में ज्यादा नहीं है, लेकिन गंगा और रामगंगा के अलावा महावा समेत सोत नदी की तलहटी होने की वजह से धान की फसल प्रभावित हुई है।
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बचाव के लिए करें दवा का छिड़काव

जिले में धान की फसल 1,53,240 हेक्टेयर में लगाई गई है। फसल लगभग 70 से 75 दिन की हो चुकी है। अगैती फसलों में बालियां निकलने लगी हैं, ऐसे में गंधी कीट और आभासी कंडुआ रोग का प्रकोप होने की संभावना बढ़ गई है। इसे देखते हुए जिला कृषि अधिकारी मनोज रावत ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि गंधी कीट दुग्धावस्था में दानों का दूध चूस लेता है। इस पर नियंत्रण के लिए किसान मैलाथियान पांच प्रतिशत (20 किग्रा प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव सुबह या शाम करें। नीम ऑयल 15 प्रतिशत का छिड़काव भी प्रभावी है।
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फोटो-

- धान के पौधों की बालियां में दाना बनने लगे हैं। कंडुआ तो लग चुका है। अगर फसल पिछैती है तो कीटनाशक का छिड़काव कर धान की गुणवत्ता और पैदावार को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय कृषि वैज्ञानिकों की सलाह भी ले सकते हैं।
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- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

धान की फसल में संक्रमित पौधे दिखाते किसान। संवाद- फोटो : अमर उजाला

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