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यह कैसी स्वच्छता...10.77 करोड़ खर्च के बाद भी गांवों में बदहाली

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दातागंज के महताबपुर में गंदगी और कीचड़। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम पर जिला योजना के तहत 10.77 करोड़ खर्च कर दिए गए, लेकिन गांवों की दुर्दशा खत्म नहीं हो सकी। गंदगी और जलभराव के कारण गांवों में संक्रामक रोग दस्तक दे रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि इस वर्ष 165 गांवों को तो संक्रामक रोगों के लिहाज से अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
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जिला योजना 2021-22 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत 14.36 करोड़ की धनराशि अनुमोदित की गई थी। इस धनराशि से विभिन्न विभागों ने गांवों में स्वच्छता कार्यक्रम के तहत काम किए। जिले की 1037 ग्राम पंचायतों के 1477 राजस्व गांवों में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत अनुमोदित बजट में से 10.77 करोड़ खर्च कर दिए गए।
बड़ा बजट खर्च होने के बाद भी गांवों में गंदे पानी की निकासी तक की व्यवस्था नहीं हो सकी। पंचायती राज विभाग के सफाई कर्मचारियों की मनमानी के कारण गांवों में नालियां बजबजा रही हैं और गंदगी के ढेर लगे हैं। शिकायतों के बाद भी पंचायती राज विभाग सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं करता। गौर करने वाली बात यह है कि जिले में 1473 राजस्व गांवों के सापेक्ष 1562 सफाई कर्मचारी तैनात हैं।
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संक्रामक रोगों के साथ मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं हाईरिस्क श्रेणी में है। हर वर्ष यहां मच्छरजनित मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। इस वर्ष भी स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग ने गंदगी और जलभराव के आधार पर 165 गांवों को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा है। पिछले वर्ष जिले में जानलेवा डेंगू के रिकार्ड 472 केस मिले थे। हर वर्ष ग्रामीण स्वच्छता पर करोड़ों खर्च जरूर हो रहे हैं, लेकिन गांवों की तस्वीर नहीं बदल रही। ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम पर बड़ा बजट खर्च होने के बाद भी गांवों की बदहाली दूर न होने पर अफसर अब हिसाब लगा रहे हैं।
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जिला योजना में ग्रामीण कार्यक्रमों पर सबसे ज्यादा हुआ खर्च
जिला योजना 2021-22 की बात करें तो ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम को अवमुक्त 14.36 करोड़ के सापेक्ष 10.77 करोड़ का बजट खर्च किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान पर 25.51 करोड़ के सापेक्ष शत प्रतिशत, मनरेगा पर अवमुक्त 89.36 करोड़ के सापेक्ष शतप्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया। इसके अलावा पशु पालन, दुग्ध विकास पर भी खूब बजट खपाया गया, लेकिन धरातल पर इसके बाद भी कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। गांवों की हालत अब भी बदतर ही है।
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गांवों में सफाई करने नहीं जाते रसूखदार सफाई कर्मी
कहने को तो जिले के 1473 राजस्व गांवों में सफाई के लिए पंचायती राज विभाग के अधीन 1562 सफाई कर्मचारियों की तैनाती है। ग्राम पंचायत निधि और स्वास्थ्य विभाग की स्वच्छता समितियों के माध्यम से भी गांवों में साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। दरअसल, बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अधिकारियों के मुंहलगे हैं। ऐसे सफाई कर्मचारियों की संख्या भी कम नहीं है जो राजनीतिक रसूख रखते हैं। ऐसे सफाई कर्मचारियों ने खुद को कार्यालयों, अधिकारियों और राजनेताओं के आवासों पर अटैच करा रखा है। यह गांवों में सफाई करने पहुंचते ही नहीं। शिकायतों के बाद भी ऐसे सफाई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
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ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम
अनुमोदित बजट- 1436.76 लाख
अवमुक्त बजट- 1436.76 लाख
खर्च किया गया बजट- 1077.18 लाख
खर्च का प्रतिशत- 73.57
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एक नजर यहां भी-
जिले में ग्राम पंचायतें- 1037
जिले में राजस्व गांव- 14173
पंचायती राज सफाई कर्मी- 1562
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जिला योजना 2021-22 में जिले को ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत 14.36 करोड़ का बजट अनुमोदित किया गया था। अनुमोदित बजट के सापेक्ष 14.36 करोड़ अवमुक्त भी किए गए थे। अवमुक्त बजट के सापेक्ष ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम पर 10.77 करोड़ खर्च किए गए। गांवों की स्थिति में काफी सुधार है। स्वच्छता में अगर कहीं पर कोई कमी है तो उसे दिखा कर दूर कराया जाएगा।
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- ऋषिराज, सीडीओ
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