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Budaun News: बच्चों में बढ़ा वायरल बुखार और सर्दी-खांसी का प्रकोप

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जिला अस्पताल में दवा लेने के लिए लाइन में मरीज लगे। संवाद
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बदायूं। अक्तूबर में दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते जिले के बच्चों में खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इससे मामूली लक्षण भी गंभीर रूप ले सकते हैं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. कप्तान सिंह ने बताया कि सुबह दस बजे के बाद तेज धूप और शाम होते ही ठंड से छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। छोटे बच्चों में सर्दी-खांसी के मामूली लक्षणों की अनदेखी करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
डॉक्टर ने कहा कि बच्चों में बुखार और खांसी सामान्य से ज्यादा दिनों तक रह रही है। इसके कारण दवा की डोज बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। डाॅ. कप्तान सिंह ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है, तो वायरस और बैक्टीरिया सांस के जरिए फैलकर अन्य बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत हो सकती है।
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अभिभावकों से अपील की गई है कि बच्चों को पौष्टिक आहार दें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही किसी भी तरह के श्वसन लक्षण की अनदेखी न करें, क्योंकि शुरुआती समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है।
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मौसम बदलने में बरतें सावधानियां
क्या करें
-पौष्टिक और हल्का भोजन दें, ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
-पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाएं और हाइजीन का ध्यान रखें।
-मामूली खांसी- जुकाम होने पर भी डॉक्टर से समय पर जांच कराएं।


क्या न करें
-बच्चों की सर्दी-खांसी को हल्के में न लें।
-खुद से दवा की डोज बढ़ाना या दवा छोड़ना नहीं।
-बच्चों को खुली हवा में ठंड में लंबे समय तक न छोड़ें।
-संक्रमित बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ बिना सावधानी के न खेलाएं।
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