ककोड़ा ग्राम पंचायत के नौ मजरों में आज भी जलती है ढिबरी
मोबाइल चार्ज करने के लिए कस्बों तक आते हैं लोग
ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत ककोड़ा के काशीनगला, जिंसीनगला, चतुरी नगला, गंगीनगला, गरौलिया, मोहननगला, धीरीनगला, खुन्नीनगला, वन्नेनगला मजरों में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। इन मजरों में हजारों की आबादी शाम ढले ढिबरी की रोशनी में ही सारे काम करती है। महिलाओं को चौका-चूल्हा करना हो या बच्चों को पढ़ाई, सारे काम ढिबरी और लालटेन की रोशनी में करने पड़ते हैं। यहां तक कि गांववालों को मोबाइल चार्ज करने के लिए कस्बों तक आना पड़ता है।
अमर उजाला टीम ने गांव गंगीनगला का दौरा किया तो यहां की पिछड़ेपन की तस्वीर सामने आई। बुजुर्गों ने बताया कि गांव में बिजली न होने से लड़कों की शादी तक में दिक्कत आती है। लड़की वाले जब सुनते हैं कि इस दौर में भी गांव में बिजली नहीं है तो वे रिश्ते तय करने से बचते हैं। कुछ लोगों ने तो झोपड़ी में मोबाइल चार्ज करने के लिए छोटी सौर प्लेट लगा रखी हैं, तो कुछ संपन्न परिवारों में बड़ी सौर प्लेट लगी हैं। गंगीनगला की कुल आबादी लगभग तीन हजार के आसपास है। इसमें लगभग सौ से अधिक घरों में सौर प्लेट लगी हैं, जो सौर ऊर्जा के जरिये लोगों का मोबाइल चार्ज करती हैं। सारे परिवार ढिबरी की रोशनी में ही जीवन यापन कर रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी पढ़ाई इसी ढिबरी की रोशनी में करनी पड़ती है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में भी इन मजरों को विद्युतीकरण के लिए चुना नहीं गया। बिजली न होने के कारण ही हजारों हेक्टेयर जमीन नलकूप की सिंचाई से वंचित है। बिजली विभाग के अफसरों का कहना है कि दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना में प्रथम चरण में जिले में गांवों को बिजली सप्लाई का लक्ष्य पूरा हो जाने की वजह से इन मजरों को अब तक योजना से नहीं जोड़ा गया। आगे काम जारी है।
प्रधान अनिल द्विवेदी ने कहा कि कई बार पिछली सरकार में अधिकारियों को लिखा गया, लेकिन किसी ने संज्ञान में नहीं लिया। अब नई सरकार बनी है, इस सरकार का लक्ष्य भी गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का है, उम्मीद है कि शीघ्र काम शुरू हो जाएगा।
विनोद कुमार कहते हैं कि बिजली न होने से बच्चे शिक्षा से दूर हो गए हैं। पढ़ने के लिए गांव के बच्चों को दूर शहरों में जाना पड़ता है, जो सक्षम नहीं हैं वे नहीं भेज पाते।
बलवीर का कहना है कि गांव की कई पीढ़ियां गुजर गई, बिजली नहीं मिल सकी। खेतों में भी किसान की लागत कम हो जाएगी, अगर बिजली के ट्यूबवैल बन जाएं।
कलावती कहती हैं कि बिजली के बिना शादियों में भी परेशानी होती है। गांव के लड़कों की शादियां नहीं हो पाती है। सरकार को चाहिए कि जल्द बिजली दिलाएं।
गंगावती का कहना है कि बिजली के लिए आस लगी तो है, जब आएगी तो गांव खुशी मनाएगा। बच्चों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं लेकिन अफसर नहीं समझते।