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...भाईचारे के आंगन में घृणा की दीवार खड़ी

Tue, 10 Mar 2015 07:24 PM IST
Bisuli
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केवी हिंदी साहित्य समिति के तत्वावधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में काव्य की रसधार बही। कवियों नें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ  व्यंग्य कसे तो कभी हास्य के रंग में सभी को डुबो दिया। चेयरमैन अबरार अहमद ने कहा कि कविताएं ही समाज का दर्पण हैं। नगर पालिका हाल में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ चेयरमैन अबरार अहमद, समिति के संस्थापक डा. सतीशचंद्र शर्मा और प्रधानाचार्य अवधेश पाठक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। श्रीदत्त शर्मा ने मां शारदा की स्तुति की।
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मुरादाबाद से आए कवि रामवीर सिंह वीर ने समाज में फैली आराजकता पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि
मेरे हरे भरे उपवन को जाने किसकी नजर लगी,
भाईचारे के आंगन में घृणा की दीवार खड़ी।
बदायूं से पधारे पवन शंखधार ने कहा कि
मैं कांटों बीच पला लेकिन फि र भी तो फू ल गुलाब रहा।
डा. अवधेश आर्य ने सुनाया-
मुहब्बत तुमसे इतनी है कि हम कह नहीं सकते,
और इतनी अधिक करते हैं कि हम सह नहीं सकते।
शायर उस्ताद बाबर खां आसी ने फरमाया
बना देता है पलभर में खिरदमंदों को दीवाना,
तेरी आखों का मयखाना तेरे होठों का पैमाना।
डा. अवधेश पाठक ने सुनाया-
मिला न दिल उससे जोड़े जा रहे है,
बेवजह पत्थर निचोड़े जा रहे हैं।
इस मौके पर कवि आदित्य तोमर, अभीक्ष पाठक, फ रीद इदरीसी, श्रीदत्त शर्मा, मशकूर नजमी, समिति के संस्थापक सतीशचंद्र शर्मा ने अपनी रचनाएं सुनाईं। गोष्ठी में आशुतोष शर्मा, उमेश पाठक, योगेश भारद्वाज, राजेश भारद्वाज, हरस्वरूप शर्मा, अर्जुन तन्हा, केपी सिंह, राजीव उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय मौजूद रहे। अध्यक्षता बाबर खां आसी ने की।
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