सहसवान के गांव खिरकबारी के खेतों में भरा पानी। संवाद
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बदायूं। गंगा और रामगंगा का जलस्तर कम होने के साथ ही अब कटान और बीमारियों का खतरा गहरा गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में काफी फसल नष्ट हो गई है। पशुओं के चारे का संकट भी पैदा हो गया है। इसके साथ ही खुरपका और मुंहपका बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। इस समय जिले के सौ से ज्यादा गांवों में बाढ़ का प्रकोप है।
गंगा और रामगंगा के तटवर्ती सहसवान, सदर और दातागंज तहसील के सौ से ज्यादा गांवों को इस बार अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बाढ़ का सामना पड़ा। गंगा लगातार पांच दिन बाद सोमवार को को भी खतरे के निशान से ऊपर रहीं। हालांकि रामगंगा अब खतरे के निशान के नीचे हैं, लेकिन बाढ़ग्रस्त गांवों में अब ज्यादा समस्याएं पैदा होने लगी हैं। गांवों में भरा बाढ़ का पानी बीमारियों को दावत दे रहा है। दातागंज तहसील के गंगा और रामगंगा के सबसे ज्यादा गांव बाढ़ प्रभावित हैं। बारिश पहले ही धान, बाजरा और तिल की फसलों को बर्बाद कर चुकी है। अब बाढ़ ने किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है।
यह बोले किसान
बारिश ने पहले ही फसलों को बर्बाद कर दिया था। बाकी की कसर गंगा और रामगंगा की बाढ़ ने पूरी कर दी है। किसानों के सामने ही नहीं पशुओं के सामने भी संकट है। -पुत्रपाल सिंह, किसान
बेमौसम बरसात के बाद बाढ़ ने किसानों को संकट में डाल दिया है। गंगा और रामगंगा का पानी जरूर उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ग्रस्त गांवों में समस्याएं कम नहीं हैं।-राजाराम, किसान
गंगा में इस बार असमय बाढ़ ने किसानों का ज्यादा नुकसान किया है। पहले बारिश और अब बाढ़ के कारण समस्याएं हैं। पशुओं के चारा और बीमारियों को लेकर चिंता है।-लियाकत, किसान
फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। काफी जमीनें कटान में समा चुकी हैं। पशुओं के लिए चारा नहीं है। अब पशुओं में बीमारियां फैलने का भी खतरा मंडरा रहा है। - सादिकान, किसान