उझानी। करीब 35 साल से लापता शंकरलाल के परिजन उस वक्त पसोपेश में पड़ गए, जब उनके घर के पास ही मंदिर के चबूतरे पर उन्हीं के जैसे बुजुर्ग बैठे नजर आए। ग्रामीणों में कुछ लोग उन्हीं को शंकरलाल मान बैठे तो बेटे ने बोलचाल के लहजे से उन्हें पहचानने से इन्कार कर दिया।
मामला कोतवाली क्षेत्र के गांव बसोमा का है। गांव के बाहरी छोर पर ग्राम देवता मंदिर के चबूतरे पर साधु जैसे लिबास में बुजुर्ग को बैठे देखा गया। पड़ोस के व्यक्ति ने उन्हें 35 साल से लापता शंकरलाल बताया। शोर मचने पर शंकरलाल के बेटे रूप बसंत भी पहुंच गए।
बताया जाता है कि 35 साल पहले लापता हुए रूप बसंत के पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। जो व्यक्ति मंदिर के चबूतरे पर बैठा मिला है, उनकी सूरत भी शंकरलाल जैसी है, ऐसा ग्रामीणों का मानना है।
वहीं रूप बसंत का कहना है कि जब पिता लापता हुए तो उनकी आयु करीब 15 साल थी। यादों के मुताबिक, वह उन्हें पिता जैसे नहीं लग रहे। फिर भी आसपास के लोगों के कहने के कारण वह बुजुर्ग को अपने घर ले आए हैं। रूप बसंत ने बताया कि मां का निधन उस समय हो गया था जब वह करीब नौ साल के थे।
अर्द्धविक्षिप्त व्यक्ति।