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बाल विकास विभाग में बंद हो गया हॉटकुक्ड

Sat, 07 Feb 2015 07:27 PM IST
badaun
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जिले में हॉटकुक्ड योजना एनजीओ की अनियमितताओं की भेंट चढ़ गई। जब इनका भुगतान रोका गया तो उल्टे संचालकों ने खुद ही लिखकर दे दिया वह काम नहीं कर पाएंगे। हॉटकुक्ड भी बंद कर दिया गया है। इस तरह जिले में हॉटकुक्ड योजना बंद हो गई है।
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शीतकालीन अवकाश में भी जहां जमकर हॉटकुक्ड का वितरण दिखाया गया, वहीं अब भुगतान का प्रकरण आते ही एनजीओ ने काम से ही हाथ खड़े कर लिए। शीतकालीन अवकाश में जब प्राथमिक विद्यालयों में हॉटकुक्ड का वितरण आम दिनों की तरह किया गया। बच्चों का पेट भरे या नहीं, लेकिन एनजीओ ने फर्जी वितरण का ब्योरा बना-बनाकर कागजों का पेट खूब भरा। निदेशक बाल विकास द्वारा कराई गई जांच में भी भारी कमियों मिलीं। हॉटकुक्ड का भुगतान रोके जाने के पीछे भी यही बात कही गई।
भुगतान रुकने की सूचना आ जाने के बाद जिले के एक-एककर सभी एनजीओ ने विभाग को लिखकर दे दिया किए ऐसी परिस्थितियों में वे काम नहीं कर पाएंगे। अटके भुगतान को पाने की कोशिश में एनजीओ जुटे हैं। वहीं विभाग पर दबाव भी बना रहे हैं कि किसी प्रकार उनका भुगतान हो सके। एनजीओ द्वारा काम न किए जाने की बात खुद डीपीओ निर्मला शर्मा ने भी स्वीकारी है।
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कैसे दूर होगा बच्चों का कुपोषण  
शासन द्वारा जहां एक ओर कुपोषण दूर करने के लिए अभियान लिया गया है, वहीं दूसरी और बाल विकास विभाग कुपोषण दूर किए जाने को वितरित करा रहा हॉटकुक्ड भी बंद हो गया है। बाल विकास विभाग की कुपोषण दूर किए जाने को विशेष जिम्मेदारी है। अब भले ही जिला, तहसील और ब्लाक स्तर के अधिकारियों द्वारा कुपोेषित दूर किए जाने को गांव गोद लिए जाएं।

बैकडेट लेटर बचाव के लिए तो नहीं!
बाल विकास में हॉटकुक्ड प्रमुख योजना है। इसके संचालन ने पूरे विभाग को ही दागदार बना डाला। पहले इसके खिलाफ हुई जांचों में भी गड़बड़ियां उजागर हुईं। जांच रिपोर्ट यहां आए और जवाब-तलब हों उससे पहले ही धड़ाधड़ लेटर जारी किए गए हैं। ऐसे लेटर भी हैं, जो खामियां निकलने से पहले भेजे जाने चाहिए, लेकिन संबंधितों को आगाह करने को अब जारी हो रहे हैं। लेटर डिस्पेच रजिस्टर से कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है।  

जांच पर भी खड़े हो रहे सवाल
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशक द्वारा जांच कराए जाने को भेजी गईं शाहजहांपुर की डीपीओ बुद्धि दुबे का यहां बिना किसी अधिकारियों के सूचित कर निरीक्षण किए जाने और कुछ ही एनजीओ को विशेष निशाने पर लेने और बाद में बैठक कर चले जाने पर भी उंगलियां उठ रही हैं। निरीक्षण को आते समय विभागीय अधिकारियों को भले ही नहीं बतातीं, लेकिन डीएम और सीडीओ स्तर पर इसकी जानकारी होनी चाहिए थी। उनके निरीक्षण में क्या गलत क्या सही था? यह बिना किसी अन्य अधिकारी के साथ रहे पता हो पाना मुश्किल ही माना
जाएगा। नियमत: ऐसे निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में ही किए जाते हैं।

हॉट कुक्ड योजना एनजीओ द्वारा संचालित न किए जाने के कारण और उनके द्वारा लिखित में यह देने कि भुगतान समेत कई कठिनाइयों के चलते वे काम नहीं कर सकेंगे। बाल विकास परियोजनाओं में चल रही योजना हॉडकुक्ड बंद हो गई है। इसे चालू कराने के लिए बात चल रही है।
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- निर्मला शर्मा, प्रभारी डीपीओ, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
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