उझानी में रामदरबार के स्वरूपों का पूजन करतीं महिलाएं। संवाद
उझानी। रामलीला शुरू होने से लेकर समापन तक प्रत्येक दिन राम दरबार में रथ पर सवार स्वरूपों के पूजन की दशकों पुरानी परंपरा धूमधाम से निभाई गई। पहले चरण पूजन फिर आरती की गई। संकीर्तन और स्वरूपों के साथ सहभोज के साक्षी लोग भक्ति में सराबोर नजर आए।
रोजाना रथ पर सवार होने वाले राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूप कलाकार नहीं बल्कि अहीरटोला मोहल्ले के खेड़ापति इलाके के किशोर होते हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि राम दरबार के स्वरूप श्रीकामधेनु गोशाला के रथ पर सवार होकर रामलीला मैदान तक पहुंचते हैं।
खास बात यह है कि रथ के पहुंचने से पहले तक रामलीला का मंचन शुरू नहीं हो सकता। राम दरबार के स्वरूपों की रास्ते में जगह- जगह आरती, फिर किसी एक भक्त के साथ उन्हें भोजन कराने की परंपरा निभाई गई। रामलीला में राजगद्दी के मंचन से पहले रविवार शाम केमिस्ट अवधेश गोयल के निवास पर स्वरूपों के पूजन और सहभोज की परंपरा के साक्षी बने भक्तों गिरीश बाबू वार्ष्णेय और राममोहन शर्मा ने बताया कि श्रद्धानुसार भेंट भी अर्पित की जाती है। स्वरूपों की आरती का विशेष महत्व है। सहभोज की परंपरा इस बार निर्दोष वार्ष्णेय, राजन यादव और वीरेंद्र सिंह आदि के निवास पर भी निभाई गई है।
-
सुरेश चंद्र शर्मा सजाते हैं राम दरबार के स्वरूप
- खेड़ापति मोहल्ले से रथ पर सवार होकर रामलीला मैदान तक राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूपों को सजाने का परंपरागत कार्य सुरेश चंद्र शर्मा निभा रहे हैं। पिछले कई साल से बरेली में निवास कर रहे सुरेश शर्मा कस्बे के ही मूल निवासी हैं। शर्मा से पहले उनके परिवार के अन्य लोग स्वरूप सजाते थे। वह रामलीला मंचन के दौरान ही पैतृक घर पर आते हैं।