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Budaun News: हेम सिंह और सलीम उपलब्ध कराते थे मोबाइल फोन के नंबर

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बदायूं। फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोह के सरगना अभी पुलिस पकड़ में नहीं आ सके है। पुलिस इनके नाम हेम सिंह व सलीम तो बता रही है, लेकिन यह कौन हैं और किस प्रदेश के रहने वाले हैं, इस बारे में अधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही है।
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बताया जा रहा है कि यहां की चार युवतियां व एक युवक इन ठगों से सोशल मीडिया के जरिए जुड़े थे। फरवरी 2025 से शहर में यह फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए है उनमें अब तक यह गिरोह करीब दस हजार लोगों को देश से लेकर विदेशों में प्राइवेट नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का शिकार बना चुका है। इन तक पहुंचने के लिए पुलिस ने 50 हजार से अधिक मोबाइल फोन नंबर भी खंगाले हैं।

करीब 11 महीने से शहर के नई सराय मोहल्ले के एक मकान में यह गोरखधंधा चल रहा था, लेकिन इनके बारे में पुलिस को पता नहीं लग सका। बीते दिनों जब साइबर सेल में ऐसी दस शिकायतें पहुंचीं तो इस मामले में जांच तेज हुई। पुलिस को करीब तीन माह से इस गिरोह की भनक थी, लेकिन पुख्ता जानकारी न होने के चलते इन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। इस गिरोह के लोगों के द्वारा दिए गए लालच व बेरोजगारी ने ही जिले की चार युवतियों व एक युवक को अपराधी बना दिया।
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इस गिरोह के ठगों का नेटवर्क बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों में फैला है। यह जिन लोगों को ठगी का शिकार बनाते हुए उनका दिया पैसा भी यहां के बजाए दूसरे प्रदेशों में खुले बैंक खातों में भेजा जाता था। गिरोह के मुख्य सरगना उनके साथ कॉल सेंटर पर काम करने वाली युवतियों व युवक से फोन पर ही बात कर सभी जानकारी देते थे। दूसरे प्रदेशों से मोबाइल नंबर भी फेक आईडी से यह उपलब्ध करवाने का काम करते थे।

लोगों को दूसरे नाम से कॉल करके बनाते थे शिकार
यहां काम करने वाले सभी युवक व युवतियां फोन कर लोगों को अपने बदले हुए नाम बताते थे। पुलिस द्वारा पकड़ा गया आरोपी विवेक खुद को राजीव के नाम से कॉल करता था। उसकी सिम भी राजीव के नाम से थी और वह कभी मुंबई तो कभी बिहार का रहने वाला बताता था। ऐसे ही आकांक्षा पटेल काे रिया शर्मा के नाम की सिम दी गई थी। अंशू पटेल को भी रिया शर्मा, ईशा साहू को नाव्या शर्मा व कृतिका शर्मा के नाम की दो सिम दी गईं थी। मीनाक्षी को निधि शर्मा नाम की सिम उपलब्ध कराई गई थी। यह सभी लोग अपना असली नाम छुपाकर फर्जी नामों से ही कॉल करके लोगों को अपने जाल में फंसाने का काम करते आ रहे थे। उनको यह बता नहीं था कि वह जेल भी जा सकते हैं।

नौकरी के लालच में बन गए अपराधी
नौकरी और पैसे का ऐसा लालच कि युवतियां भी अपराधी बनकर लोगों से ठगी करने लगीं। युवतियों ने पुलिस की पूछताछ में खुलासा किया है कि उनको 15 हजार रुपये महीने के वेतन पर रखा गया था। उनको पता नहीं था कि वह एक दिन जेल भी जा सकती हैं। बताया कि सभी युवतियां पढ़ी लिखी हैं। कोई बीएससी तो कोई बीए पास है। उन्होंने बताया कि करीब तीन माह पहले ही उन्हें नौकरी पर रखा गया था। उन्हें नहीं पता कि यहां क्या चल रहा था। उनसे काल कराने को कहा जाता था। आरोपित हेम सिंह उर्फ टिंकू मौर्य और सलीम उर्फ अबलू ही उन्हें मोबाइल नंबर उपलब्ध कराते थे, जिस पर वह कार्यालय आकर काल करती थीं। अब तक उन्हें एक माह का वेतन भी नहीं दिया गया था। पुलिस हेम सिंह उर्फ टिंकू व सलीम की तलाश में पुलिस जुट गई है।



15 लोगों को बीजा देकर विदेश भेजने की थी तैयारी
एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जिले से 15 लोगों को विदेश का बीजा दिलाकर इस ठगी की दुनिया में धकेला गया था। यह तो गनीमत रही है कि वह सभी लोगों को पुलिस ने विदेश जाने से पहले ही रोक लिया। इन लोगों को विदेश में ऊंचे पद पर एक लाख रुपये महीने तक नौकरी देने का लालच दिया गया था। एसपी सिटी ने बताया अब जिले के लोगों को इस तरह के लालच में न फंसना चाहिए। इसके लिए भी वह अभियान चलवाकर लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे।

यह माल हुआ बरामद



लेपटॉप, प्रिंटर, माउस, लेपटॉप चार्जर, सात स्मार्ट फोन, चार मोबाइल कीपेड, सात मोबाइल चार्जर, 23 सिम कार्ड, एक एचडीएफ मुंबई की स्टांप मौहर, एक हाजिरी रजिस्टर, चार काॅपी, एक किरायेनामा की फोटोकाॅपी बरामद की गई।

लंबा है गिरोह, जिले में भी पकड़े जा सकते है कई आरोपी
ठगी का यह गिरोह काफी लंबा है। जिले में भी अभी कई आरोपी और पकड़े जा सकते है। पुलिस की जांच में इस तरह की बातें सामने आई है। हालांकि गिरोह के ज्यादातर सरगना दूसरे प्रदेशों के ही बताए जा रहे है। इनको पकड़ने के लिए भी पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

शहर से दस किलोमीटर की दूरी के रहने वाले सभी आरोपी
गिरोह के सभी चार युवती व एक युवक शहर से दस किलोमीटर की दूरी के रहने वाले वाले निकले हैं। मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गोविंद नगला निवासी विवेक है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव बरातेगदार की रहने वाली आकांक्षा पटेल है। लखनपुर गांव की रहने वाली अंशू पटेल है। मूसाझाग थाना क्षेत्र के कस्बा गुलड़िया निवासी ईशा साहू है, जबकि मीनाक्षी उझानी कोतवाली क्षेत्र के बरायमयखेड़ा की रहने वाली है।


फरवरी 2025 से इस गिरोह की यहां सक्रियता चल रही थी। अब तक करीब दस हजार लोगों को यह गिरोेह अब तक ठग चुका है। पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है। इस गिरोह पर दूसरे प्रदेशों में भी साइबर ठगी के मामले दर्ज है। - विजयेंद्र द्विवेदी, एसपी सिटी
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