बदायूं। ओमिक्रॉन और तीसरे लहर के गहराते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में करीब 150 लोगों की जान गई थी। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में 97 लोगों की मौत होने की बात स्वीकारी गई।
विशेषज्ञों ने फरवरी में ओमिक्रॉन के खतरे के साथ तीसरी लहर की बात कही है। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राज्यों को गाइड लाइन जारी की गई है। शासन स्तर से दिशा निर्देश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी काम शुरू हो गया है। दूसरी लहर के दौरान अव्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग और सरकार की काफी किरकिरी हो चुकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अब चूक नहीं होने देना चाहता।
तैयारियों पर उठ रहे सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्थाओं को लेकर समीक्षा शुरू कर दी है। दूसरी लहर के दौरान जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के साथ रुदायन और घटपुरी सीएचसी को कोविड अस्पताल बनाया गया था। यहां ऑक्सीजन प्लांट भी लगाए गए।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो और जिला अस्पताल में भी एक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। हालांकि, सभी स्थानों पर व्यवस्थाएं अब भी पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हैं। इस बीच जारी की गई गाइड लाइन के बाद एक बार फिर तैयारियों को दुरुस्त करने का काम शुरू हो गया है। सीएमओ डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर ने इसके लिए एक टीम बनाई है। यह टीम इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट देगी।
फिलहाल जिले में कोरोना का कोई सक्रिय मामला नहीं
फिलहाल जिले में कोरोना का कोई सक्रिय मामला नहीं है। पिछले दिनों म्याऊ ब्लॉक के एक गांव के युवक को कोरोना की पुष्टि हुई थी। हालात सामान्य होने के चलते उसे घर पर ही क्वारंटीन कर दिया गया था। अब वह भी निगेटिव हो चुका है। करीब 20 दिन से कोई नया संक्रमित नहीं मिला है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में 16 स्थानों पर कोरोना की जांच के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
ओमिक्रॉन और फरवरी में संभावित तीसरी लहर को लेकर सभी तैयारियों को दुरुस्त किया जा रहा है। पहली और दूसरी लहर के दौरान जिन संसाधनों की कमी थी वह कमी अब नहीं है। शासन स्तर से मिल रही गाइड लाइन के अनुसार तैयारियों की समीक्षा भी की जा रही है। लोगों को चाहिए कि टीकाकरण जरूर कराएं। साथ ही मास्क और दो गज की दूरी का भी पालन करें।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
राजकीय मेडिकल कॉलेज में दवाए, स्टाफ आरक्षित
बदायूं। मेडिकल कॉलेज में ओमिक्रॉन संदिग्ध या संक्रमित मरीजों के लिहाज से 25 बेड आरक्षित कर दिए गए हैं जबकि कोरोना केस के मरीजों के लिए 75 बेड आरक्षित कर अलग वार्ड बनाया गया है। पिछले दिनों बरेली से एडी हेल्थ ने भी अपनी टीम के साथ में कॉलेज की स्थिति का जायजा लिया था ताकि अगर जिले में ओमिक्रॉन का मरीज मिले तो उसका यहां किसी तरह से इलाज कराया जाए। वहीं
कॉलेज प्रशासन ने बनाया ड्यूटी रोस्टर
ओमिक्रॉन को ध्यान में रखते हुए कॉलेज प्रशासन की ओर से अलग से ड्यूटी रोस्टर भी बनाया गया है ताकि मरीज आने पर निर्धारित रोस्टर के हिसाब से टीम की ड्यूटी लगाई जा सके। एक टीम में एक डॉक्टर, एक सिस्टर इंचार्ज, दो नर्स, दो वार्ड ब्वॉय, दो स्वीपर को शामिल किया गया है। जबकि एक सीनियर डॉक्टर को सुपरविजन के लिए लगाया गया है।
ओमिक्रॉन के लिए 25 बेड आरक्षित किए गए हैं। साथ ही कोरोना के मरीजों के लिए 75 बेड आरक्षित हैं, वहीं मरीजों की देखभाल के लिए शिफ्टवार टीम का रोस्टर बनाया गया है। दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में हैं।
- डॉ. धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज