बदायूं। जिला अस्पताल में चौबीस घंटे बिजली सप्लाई के लिए खुद का बिजली उपकेंद्र होने के बाद भी यहां बिजली कटौती की समस्या बनी रहती है। इससे भी ज्यादा समस्या कभी हाई तो कभी लो वोल्टेज की है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। इस बीच वोल्टेज की ट्रिपिंग के कारण जिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट की मशीन फुंक गई। करीब चौबीस घंटे के बाद दिल्ली और वाराणसी से आई टीम ने प्लांट को फिर से चालू किया। हालांकि, अस्पताल स्टॉक में ऑक्सीजन के भरे सिलिंडर होने के कारण कोई समस्या नहीं हुई।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से काफी लोगों की जान गई थी। इसके बाद जिला अस्पताल में एक और मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। हर प्लांट की क्षमता 1000 लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन की है। ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन के जरिये ऑक्सीजन को इमरजेंसी समेत अन्य वार्ड में पहुंचाया जाता है। सबसे ज्यादा जरूरत इमरजेंसी में होती है। जिला अस्पताल में बार-बार बिजली गुल होने के साथ वोल्टज कम ज्यादा होने का असर ऑक्सीजन प्लांट समेत अन्य चिकित्सा सेवाओं पर भी हो रहा है।
कम वोल्टेज के कारण ऑक्सीजन प्लांट काम छोड़ रहा है तो दूसरी ओर ज्यादा वोल्टेज के कारण उपकरण फुंक रहे हैं। आपात स्थिति के लिए अस्पताल प्रशासन सिलिंडर स्टॉक में रखता है। ज्यादा वोल्टेज के कारण प्लांट की मशीन फुंकने और प्लांट ठप होने के बाद चौबीस घंटे तक इन सिलिंडरों के जरिये ही काम चलाया गया। सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने प्लांट लगाने वाली कंपनी को इस बारे में सूचना दी, जिसके बाद दिल्ली और वाराणसी से आई तकनीकी टीम ने चौबीस घंटे के बाद प्लांट चालू कर दिया।
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समस्या से निपटने को लगाया गया स्टेबलाइजर
जिला अस्पताल के बिजली उपकेंद्र से नियमित वोल्टेज कम और ज्यादा होने का असर ऑक्सीजन प्लांट की मशीनरी पर न हो इसके लिए प्लांट में अब एक नया स्वचालित वोल्टेज स्टेबलाइजर लगा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्टेबलाइजर वोल्टेज को नियंत्रित करेगा। प्लांट को नियमित एक समान वोल्टेज मिलने से मशीनरी पर प्रतिकूल असर नहीं होगा।
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कम वोल्टेज के कारण नहीं चली थी नेबुलाइजर मशीन
सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार की चार साल की बेटी को तीन दिन पहले नेबुलाइजेशन की जरूरत थी। रात में वह करीब साढ़े तीन बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे थे। इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. नितिन सिंह थे, लेकिन वह नहीं मिले। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने रात में ही सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय को कॉल की, सीएमओ के निर्देश पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कप्तान सिंह इमरजेंसी पहुंचे। यहां एक के बाद एक तीन नेबुलाइजर मशीन चलाकर देखी गईं, लेकिन मशीनों ने काम नहीं किया। इस पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं की पोल खुल गई। चिकित्साधीक्षक डॉ. कप्तान सिंह का कहना है कि मशीनें चल रही थीं, लेकिन कम वोल्टेज होने के कारण स्टीम नहीं बन रही थी।
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जिला अस्पताल में चौबीस घंटे बिजली के लिए आरक्षित बिजली उपकेंद्र है। अस्पताल प्रशासन हर माह बिल के रूप में लाखों में भुगतान करता है, इसके बाद भी बिजली सप्लाई ठप रहती है। वोल्टेज की बड़ी समस्या है। वोल्टेज की समस्या के कारण चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसी कारण ऑक्सीजन प्लांट में खराबी आई। सूचना दिए जाने के चौबीस घंटे के बाद तकनीकी टीम खराबी दूर तक प्लांट चालू कर सकी।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस