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केवल दवाएं ही नहीं, प्रसूताओं को भोजन देने में भी गड़बड़झाला

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जिला महिला अस्पताल में दीवार पर लिखी आहार तालिका। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में 2004 से 2006 के बीच करोड़ों के घोटाले के बाद 2007 से 2012 में हुए अन्य घपले सिर्फ बानगी भर हैं। तीन सीएमओ समेत सात लोगों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा में एफआईआर और अन्य घोटाले में तीन सीएमओ समेत कई बाबुओं के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में ट्रायल के बाद भी यहां भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। इसी क्रम में प्रसूताओं को भोजन देने में भी काफी गोलमाल है।
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महिला अस्पताल में सामान्य प्रसव के दौरान कम से कम 48 घंटे और सिजेरियन से प्रसव पर आठ से दस दिन अस्पताल में भर्ती रखा जाता है। इस दौरान भर्ती प्रसूता के लिए खाने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन करता है। प्रसूताओं को अस्पताल में भर्ती रखने के दौरान पौष्टिक आहार पर सरकार काफी मोटा बजट खर्च करती है। इसके बावजूद अस्पताल में भर्ती करने के दौरान प्रसूताओं को पौष्टिक आहार के नाम पर सिर्फ दाल, चावल और रोटी ही दी जा रही है। आहार तालिका के अनुरूप प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।
प्रसूताओं को दिन जाने वाले पौष्टिक भोजन में गड़बड़झाले का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। आहार तालिका के अनुसार सुबह नाश्ते में 200 ग्राम दूध के साथ दो अंडे, चार ब्रेड, दस ग्राम मक्खन, दलिया और पोहा मिलना चाहिए तो दोपहर के भोजन में चार रोटी, दाल, मौसमी सब्जी, दही, चावल और सलाद होना चाहिए। शाम के भोजन में चार रोटी, मौसमी सब्जी, चावल और मौसमी फल होना चाहिए, लेकिन प्रसूताओं को आहार तालिका के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा। महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं से बात करने पर उन्होंने इस आशय की जानकारी भी दी।
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भ्रष्टाचार के कई मामलों में चल रही जांच
सीएमएस डॉ. रेखा रानी के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामलों में जांच चल रही है। उनकी कई शिकायतें शासन स्तर तक ही जा चुकी हैं, लेकिन अब तक जांच कार्रवाई में नहीं बदल सकी है। दरअसल, बतौर सीएमएस डॉ. रेखा रानी की बदायूं में तैनाती को करीब छह साल हो चुके हैं। इन छह साल में उन पर कई आरोप लग चुके हैं। अलग-अलग मदों में फर्जी-बिल बाउचर से भुगतान के आरोप उनके साथ एक रिटायर्ड बाबू पर भी हैं। इस मामले में एडी हेल्थ के स्तर से जांच की जा रही है। स्टोर से काफी सामान ठिकाने लगाए जाने का आरोप भी है। इसमें इस कर्मचारी की संलिप्तता की जांच भी चल रही है।
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प्रसूताओं और उनके तीमारदारों ने बयां की हकीकत
मुजरिया थाने के गांव जमालपुर का रहने वाला हूं। हादसे में गर्भवती बेटी घायल हो गई थी। सोमवार को बेटी को मृत बच्चा पैदा हुआ। उसको डॉक्टर भी नहीं देख रहे, रही बात भोजन की तो उसकी गुणवत्ता खराब है। भोजन में फल, मक्खन, सलाद आदि भी दिया जाता है यह तो पता ही नहीं।
-इतवारी, तीमारदार
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सुबह के समय दूध के साथ चार पापे मिलते हैं। अंडा, मक्खन, दही या फिर सलाद आदि नहीं मिलता। आज दोपहर के भोजन में दाल, चावल और रोटी मिले। सब्जी नहीं थी, अस्पताल में भर्ती काफी प्रसूताओं का भोजन उनके घरों से आता है। दूर दराज की प्रसूताएं ही यहां का भोजन लेती हैं।
-अर्चना, प्रसूता सूरजपुर
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दूध, अंडा, दही या फिर फल नहीं मिलते। दोपहर और शाम को भोजन में दाल, रोटी, चावल के साथ कभी-कभी सब्जी मिलती है। भोजन की गुणवत्ता तो ठीक-ठाक लगती है। सुबह के समय जो दूध दिया जाता है उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती। दूध में पानी ज्यादा मिला होता है।
-सौरभ, प्रसूता ललऊ नगला
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फोटो- 23
आज अस्पताल से छुट्टी हुई है। यहां मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है। आहाल तालिका तो दीवार पर लिखी है, लेकिन इसके मुताबिक प्रसूताओं को आहार नहीं दिया जा रहा। तीन दिन भर्ती रहने के दौरान एक भी दिन किसी प्रसूता को फल, अंडा, मक्खन, दही, सलाद नहीं दिया गया।
-मीरा मौर्य, प्रसूता शहवाजपुर
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अस्पतालों में प्रसूताओं और रोगियों को भोजन का मेन्यू निर्धारित है। सभी स्थानों पर आहार तालिका लिखी भी होनी चाहिए। आहार तालिका के अनुसार ही पौष्टिक भोजन दिया जाना चाहिए। अगर प्रसूताओं को आहार तालिका के अनुसार पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा तो यह गलत है। मामले में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. दीपक अहोरी, एडी हेल्थ
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