फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बच्चों के टीकाकरण में बदायूं धड़ाम, 66 वें नंबर पर खिसका

विज्ञापन
कोरोना की टीका लगवाती बालिका।संवाद - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
बदायूं। बच्चों के टीकाकरण के मामले में बदायूं बुरी तरह से पिछड़ रहा है। प्रदेश स्तर पर 12 से 14 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण में बदायूं की 66 वीं रैंक अधिकारियों को परेशान कर रही है, तमाम कोशिशों के बाद भी बच्चों का टीकाकरण रफ्तार नहीं पकड़ रहा। हालांकि, किशोर-किशोरियों के टीकाकरण मामले में जिले की स्थिति बेहतर है।
विज्ञापन

कोरोना टीकाकरण के मामले में बदायूं की रैंकिंग काफी बेहतर रही है। 18 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम आयु वर्ग में शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है, दूसरी ओर 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग में स्थिति बेहद खराब है। जिले में 12 से 14 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण 16 मार्च से शुरू हुआ था। जिले में 1.32 लाख बच्चों को टीका लगाया जाना है। इसके सापेक्ष अब तक 17163 बच्चों को ही टीका लगाया जा सका है। लक्ष्य के सापेक्ष यह महज 12.95 फीसदी है। प्रदेश के 75 जिलों की बात करें तो बदायूं की रैंक 66 वीं है। प्रदेश के 65 जिले बच्चों के टीकाकरण मामले में बदायूं से आगे हैं। सोमवार को प्रदेश स्तर से रैंक मिलने के बाद बच्चों के टीकाकरण को लेकर अधिकारियों के माथे पर शिकन है।
दूसरी ओर 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग की बात करें तो यह टीकाकरण तीन जनवरी को को शुरू हुआ था। जिले को 2.19 लाख किशोर-किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य के सापेक्ष 96 प्रतिशत टीकाकरण के साथ बदायूं प्रदेश में 15 में स्थान पर है। इस आयु वर्ग में 45 प्रतिशत को दूसरी डोज भी दी जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में लगातार अवकाश के कारण टीकाकरण रफ्तार नहीं पकड़ रहा।
विज्ञापन

-
स्कूलों में अवकाश के कारण पिछड़ा टीकाकरण
12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण पिछड़ने का एक कारण स्कूलों में अवकाश और स्वास्थ्य विभाग कर्मियों की लेटलतीफी भी है। टीकाकरण शुरू हुए एक महीने होने जा रहा है और अब तक करीब 13 फीसदी लक्ष्य ही प्राप्त हो सका है। दरअसल, जिले में बच्चों के टीकाकरण के लिए केवल 17 केंद्र हैं। पहले दिन डीपीएस में टीकाकरण शिविर लगाया गया, इसके बाद स्कूलों में वृहद स्तर पर टीकाकरण शिविर नहीं हो सके। जागरूक अभिभावक केंद्रों पर जाकर बच्चों को टीका लगवा रहे हैं, दूसरी ओर काफी अभिभावक हैं जो स्कूल में टीकाकरण शिविर लगने का इंतजार कर रहे हैं।
-
अभिभावकों ने कहा-अभियान की सफलता को सभी की सहभागिता जरूरी
बच्चों को टीका लगवाने की जिम्मेदारी उनके अभिभावकों की है। टीकाकरण को लेकर किसी तरह की कोई भ्रांति नहीं है। कोरोना से सुरक्षा के लिए सभी को कवच की जरूरत है।
-इंदिरा कश्यप
-
यह बात सकी है कि टीकाकरण को लेकर अभिभावक ही लापरवाही बरत रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी चाहिए कि स्कूलों में वृहद स्तर पर टीकाकरण शिविरों का आयोजन करे।
-किमी रस्तोगी
-
अगर स्कूल में टीकाकरण कैंप का आयोजन नहीं हो रहा तो अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने नजदीकी केंद्र पर बच्चे को साथ ले जाएं और टीका लगवाएं, टीका बेहद जरूरी है।
-भव्या
-
टीकाकरण केंद्रों के बारे में लोगों को पता नहीं है। दरअसल, बच्चों के लिए अलग से वैक्सीन है। उसके लिए सिर्फ 17 टीकाकरण केंद्र हैं। इस कारण भी प्रगति नहीं हो रही।
-अंजली भारती
-
बच्चों के टीकाकरण मामले में अपेक्षित लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। इसका एक कारण यह भी है कि स्कूलों में अवकाश और स्वास्थ्य विभाग का अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त होना भी है। अभिभावकों को चाहिए कि वह नजदीकी टीकाकरण केंद्र पर जाकर बच्चे को टीका जरूर लगवाएं।
विज्ञापन

-डॉ. मोहम्मद असलम, एसीएमओ/नोडल अधिकारी टीकाकरण
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें