डॉ. सुधीर नर्सिंग होम में अब तक इस योजना के तहत 12 ऑपरेशन हो चुके हैं। नर्सिंग होम के संचालक डॉ. सुधीर ने बताया कि हमारे नर्सिंग होम में तीन डॉक्टर हैं। जब से योजना शुरू हुई है तब से हम 12 ऑपरेशन कर चुके हैं। इसका भुगतान एक लाख 67 हजार रुपये बन रहा है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है। जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई थी, तब भी हमने काम किया था। उस समय के छह लाख 70 हजार रुपये आज तक नहीं मिले हैं। इससे मनोबल टूटता है। तुरंत भुगतान हो तो कम से कम काम चलता रहता है।
वहीं सिटी हॉस्पिटल के संचालक संजय यादव ने कहा कि हमारे हॉस्पिटल में तीन ऑपरेशन हुए थे। इसके लिए हमें बाहर से डॉक्टर बुलाने पड़े थे। उनका तो पेमेंट हो गया लेकिन हमारा 64 हजार रुपये अटक गए। भुगतान नहीं होगा, तो मरीजों का कैसे इलाज करेंगे।
मामले को लेकर सीएमओ प्रभारी डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि भुगतान कराने के लिए ऑन लाइन रिपोर्ट भेजनी पड़ती है। कोई कमी रह गई होगी, जिससे भुगतान नहीं हुआ होगा। जो अस्पताल काम नहीं कर रहे हैं उनके साथ अगले सप्ताह बैठक करेंगे और उनकी समस्याओं को खत्म किया जाएगा।
उसावां थाना क्षेत्र निवासी विजयभान सिंह ने स्वास्थ्य विभाग और सरकारी मशीनरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसकी सूची में उनका नाम था। 30 हजार रुपये तक के इलाज के लिए कार्ड भी बने थे। करीब दो साल तक कार्ड से इलाज हुआ, लेकिन आयुष्मान भारत योजना में उनका नाम गायब कर दिया गया, जबकि उनके पास नाममात्र की जमीन है। एक दुकान से परिवार का खर्च चलता है। एक बेटा और तीन बेटियां हैं। जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके साथ अन्याय किया है।